उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक नया विधेयक मंजूर किया है, जिसके तहत राज्य के 13 में से 11 जिलों में बाहरी लोगों के लिए कृषि और बागवानी भूमि खरीदने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. यह विधेयक राज्य विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा. इस कदम का उद्देश्य राज्य के प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक धरोहर और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है.
इस विधेयक के तहत, जो भूमि नगरपालिका सीमा के अंदर आती है, उसका इस्तेमाल केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकेगा, जो सरकार ने तय किया है. अगर कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उस भूमि को राज्य सरकार के पास भेज दिया जाएगा. इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों में भूमि को सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए जमीन को एकजुट करने और समझौते करने पर जोर दिया जाएगा. इससे भूमि का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा और अतिक्रमण की समस्या को रोका जाएगा.
इस विधेयक का उद्देश्य 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार द्वारा किए गए बदलावों को रद्द करना है. 2017 में, उत्तराखंड (पहले उत्तर प्रदेश) में जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार कानून में बदलाव किया गया था, जिसके तहत पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि खरीदने की सीमा को 12.5 एकड़ से बढ़ाकर 30 एकड़ कर दिया गया था. इसके अलावा, पर्यटन, ऊर्जा, उद्योग, कृषि और बागवानी के लिए इस सीमा को और भी बढ़ाया गया था. इन बदलावों के बाद, भूमि के लेन-देन के अधिकार जिला मजिस्ट्रेटों को दे दिए गए थे.
नए विधेयक के तहत, ये अधिकार जिला मजिस्ट्रेटों से वापस लिए जाएंगे और बाहरी लोग जब भूमि खरीदेंगे, तो उन्हें एक समर्पित पोर्टल पर अपना लेन-देन रिकॉर्ड करवाना होगा. इसके साथ ही, बाहरी निवासियों को भूमि खरीदने से पहले एक शपथ पत्र देना होगा, ताकि धोखाधड़ी और अनियमितताओं को रोका जा सके. आखिर में, भूमि की खरीद और बिक्री की अंतिम मंजूरी राज्य प्रशासन ही देगा.
इस विधेयक में भूमि अधिकारों को लेकर कुछ बदलाव भी किए गए हैं. अभी, बाहरी लोग नगरपालिका क्षेत्रों के बाहर 250 वर्ग मीटर भूमि रहने के उद्देश्य से खरीद सकते हैं. यह प्रावधान बरकरार रहेगा, लेकिन कृषि और बागवानी भूमि की जमा करने पर रोक लगाई जाएगी. ये पाबंदियां पहले कांग्रेस सरकार (2002-2007) के दौरान लागू की गई थीं, जब बाहरी लोगों के लिए भूमि खरीद की सीमा 500 वर्ग मीटर तक सीमित कर दी गई थी. बाद में बीजेपी सरकार ने इसे घटाकर 250 वर्ग मीटर कर दिया था. 2017 में, रावत सरकार ने इन पाबंदियों को हटा दिया था.
भू-अधिग्रहण के कुछ विवादास्पद मामलों पर भी चर्चा हो रही है. 2024 में, उत्तराखंड सरकार ने कृषि भूमि के उपयोग पर सख्त कदम उठाए थे. कई लोग जिन्होंने कृषि भूमि खरीदी थी, लेकिन उसका उपयोग नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई. उदाहरण के लिए, 2024 में नैनीताल जिले में एक आधा हेक्टेयर भूमि को जब्त किया गया, जो उत्तर प्रदेश के विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) की पत्नी के नाम पर थी. इस भूमि का कोई उपयोग नहीं किया गया था. इसी तरह, अभिनेता मनोज बाजपेयी द्वारा अल्मोड़ा जिले में खरीदी गई भूमि को भी जांच के दायरे में लिया गया था.
राज्यभर में सख्त भूमि कानूनों की मांग को लेकर पिछले कुछ समय में विरोध प्रदर्शन बढ़ गए थे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विधेयक को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह राज्य के संसाधनों, सांस्कृतिक धरोहर और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा, और राज्य की मूल पहचान को बनाए रखेगा.
इस फैसले के बाद उत्तराखंड उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां बाहरी लोगों के लिए भूमि खरीदने पर सख्त पाबंदियां हैं. उत्तराखंड के अलावा कई अन्य राज्यों में भी बाहरी लोगों के लिए भूमि खरीद पर सख्त पाबंदियां हैं:
हलांकि, इन राज्यों और क्षेत्रों में बाहरी लोगों पर भूमि खरीदने के प्रतिबंध लगाने के कई महत्वपूर्ण कारण हैं. जैसे कई राज्य और जनजातीय क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के लिए भूमि सुरक्षा कानून लागू करते हैं. साथ ही, स्थानीय निवासियों को भूमि खरीद में बाहरी लोगों से होने वाली प्रतिस्पर्धा से बचाना भी एक कारण है. इसके अलावा, कुछ राज्यों में जनसांख्यिकीय बदलाव के डर से भी बाहरी लोगों पर पाबंदी लगाई जाती है.
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