उत्तर प्रदेश में एक अप्रैल से ही गेहूं खरीद का काम विपणन एजेंसियों के माध्यम से शुरू हो चुका है. पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 6000 गेहूं खरीद केंद्र बनाए गए हैं. प्रदेश के ज्यादातर खरीद केंद्र सूने पड़े हैं. मौसम के चलते कहीं गेहूं की फसल खराब हो गई, तो कहीं किसान अपनी फसल की कटाई तक नहीं कर सके हैं. इसके चलते भी खरीद केंद्र खाली पड़े हैं. लखनऊ में कुल 42 गेहूं खरीद केंद्र बनाए गए हैं जहां पर तीन अलग-अलग विपणन एजेंसियों के माध्यम से खरीद का काम किया जाना है. इस बार सरकार ने 2125 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है. पिछले पांच दिनों में लखनऊ के किसी भी केंद्र पर गेहूं की खरीद नहीं हो सकी है.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कुल 42 गेहूं खरीद केंद्र बनाए गए हैं. जिले में अब तक 232 किसानों ने फसल बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराया है. लखनऊ के एडीएम सिविल सप्लाई साहब लाल ने किसान तक को बताया कि जिले के सभी खरीद केंद्रों पर किसानों के बैठने के लिए शेड, जल, आवश्यक सूचनाओं से युक्त बैनर, खरीद पंजिका, बोरों की व्यवस्था के साथ-साथ पीओएस मशीन से युक्त लैपटॉप, आईपैड, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, नमी मापक यंत्र, पंखा, डस्टर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं.
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मार्च महीने में हुई बेमौसम बारिश के चलते गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. प्रदेश के सभी हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि के चलते गेहूं की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. किसानों की गेहूं की फसल खराब मौसम के चलते लेट हो गई है. मौसम साफ ना होने के कारण ज्यादातर किसानों ने गेहूं की कटाई नहीं की थी. इसी वजह से खरीद केंद्रों पर किसान नहीं पहुंच रहे हैं.
लखनऊ के एडीएम सिविल सप्लाई साहब लाल ने बताया कि लखनऊ के सभी 42 खरीद केंद्रों पर अभी कोई गेहूं खरीद नहीं हो सकी है. किसानों का इंतजार है. खरीद ना होने के पीछे वजह ये है कि बाजार में गेहूं की कीमत किसानों को ज्यादा मिल रही है, इसलिए वे सरकारी खरीद केंद्रों को छोड़कर बाजार में फसल बेच रहे हैं. लखनऊ की मंडियों में गेहूं 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीद हो रही है जबकि सरकार के द्वारा 2125 रुपये गेहूं खरीद का मूल्य निर्धारित किया गया है. ऐसे में किसान घाटे में क्यों अपनी फसल बेचकर नुकसान उठाए.
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