
मध्यप्रदेश अब सिर्फ हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि ग्रीन और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी कर रहा है.प्रदेश में सौर और पवन ऊर्जा की संभावनाओं को देखते हुए सरकार बड़े स्तर पर नई परियोजनाओं पर काम कर रही है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ. इसके तहत मध्यप्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग से जुड़े तीन बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहयोग मिलेगा.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में ग्रीन एनर्जी की असीम संभावनाएं हैं और सरकार इन संभावनाओं को चरणबद्ध तरीके से विकसित कर रही है.
इस समझौते का सबसे अहम हिस्सा ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है. योजना के तहत 278 मेगावाट के ओंकारेश्वर फेज के लिए समझौता किया गया है. इसके अलावा ओंकारेश्वर में करीब 300 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता के लिए जलाशय क्षेत्र और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध बताया गया है.इस तरह यहां 600 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की दिशा में तैयारी की जा रही है. फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट में जमीन पर सोलर पैनल लगाने के बजाय जलाशय की सतह पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं.इससे उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है
ओंकारेश्वर में प्रस्तावित परियोजना को लेकर पहले ही सर्वे, प्री-फिजिबिलिटी स्टडी और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट का अध्ययन किया जा चुका है.
सरकार अब सिर्फ सौर ऊर्जा पैदा करने पर ही ध्यान नहीं दे रही, बल्कि बिजली को स्टोर करने की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दे रही है.
पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत 2 घंटे के को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम वाले फ्लोटिंग सोलर पीवी प्रोजेक्ट के लिए 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान बताया गया है.इससे दिन में पैदा होने वाली सौर बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा की क्षमता बढ़ाना नहीं है. ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना भी लक्ष्य है जो विश्वसनीय, सस्ती, टिकाऊ और 24×7 उपलब्ध हो.इसके लिए सोलर और विंड एनर्जी के साथ-साथ ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी स्टोरेज क्षमता को भी मजबूत किया जाएगा.
सरकार का मानना है कि इससे ग्रिड को स्थिर रखने, ज्यादा मात्रा में ग्रीन एनर्जी को बिजली व्यवस्था में जोड़ने और बिजली की सबसे ज्यादा मांग वाले समय को संभालने में मदद मिलेगी.
इस समझौते के तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक की ओर से RUMSL को तीन नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बिना शुल्क ट्रांजेक्शन एडवाइजरी सर्विसेस उपलब्ध कराई जाएंगी.इसका उद्देश्य ऐसी परियोजना और कारोबारी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें लंबे समय के निवेश को आकर्षित किया जा सके और प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से टिकाऊ रहें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सहयोग से मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा को सिर्फ बिजली बनाने का साधन नहीं माना जाना चाहिए.सरकार इसे औद्योगिक विकास, ग्रीन निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बनाना चाहती है.मध्यप्रदेश में सौर और पवन ऊर्जा की बड़ी संभावनाओं का इस्तेमाल करते हुए आने वाले समय में ग्रीन एनर्जी से जुड़े नए उद्योग और निवेश आने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट, नई तकनीक और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के जरिए देश में अपनी अलग पहचान बनाई है.अब सरकार का फोकस इस क्षेत्र को और विस्तार देने पर है, ताकि प्रदेश की बढ़ती बिजली जरूरतों को स्वच्छ ऊर्जा के जरिए पूरा किया जा सके.
मुख्यमंत्री ने तीनों परियोजनाओं के लिए तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता देने पर एशियन डेवलपमेंट बैंक का आभार जताया.साथ ही RUMSL और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की पहल की सराहना की.
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