अदरक खरीदी पर मिजोरम सरकार ने दिया अपडेट (AI Image)मिजोरम सरकार ने इस साल स्थानीय किसानों से 2 लाख क्विंटल से ज्यादा अदरक खरीदा है. यह खरीद राज्य की प्रमुख ‘बाना कैह’ यानी हैंडहोल्डिंग योजना के तहत की गई है. राज्य के कृषि और किसान कल्याण मंत्री पीसी वानलालरुआता ने मंगलवार को विधानसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी. मंत्री ने कहा कि 18 अगस्त तक किसानों से कुल 2,00,481.55 क्विंटल अदरक की खरीद हो चुकी है. सरकार ने इसके लिए किसानों को समर्थन मूल्य उपलब्ध कराया है. इस खरीद के जरिए राज्य सरकार का उद्देश्य स्थानीय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना और उनकी आजीविका को मजबूत करना है.
कृषि मंत्री पीसी वानलालरुआता ने बताया कि 2025 और 2026 के दौरान किसानों से खरीदे गए अदरक के लिए अब तक 192.63 करोड़ रुपये का समर्थन मूल्य जारी किया जा चुका है. इसमें 2025 में 141.50 करोड़ रुपये और इस साल अब तक 51.13 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है.
मंत्री ने विधानसभा को बताया कि किसानों को समर्थन मूल्य के भुगतान का सरकार पर कोई बकाया नहीं है. पूरी राशि पहले ही जारी कर दी गई है और इसे डीएएमसी खाते में जमा कराया जा चुका है. अब संबंधित किसानों के बैंक खातों में यह रकम ट्रांसफर की जा रही है.
मिजोरम सरकार ‘बाना कैह’ योजना के तहत अदरक के अलावा हल्दी, मिर्च, झाड़ू बनाने वाली घास और बिना छिलके वाले चावल यानी धान की भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करती है. सितंबर 2024 में शुरू की गई इस योजना में किसानों को उनकी प्रमुख फसलों के लिए सरकारी समर्थन मूल्य देने का प्रावधान किया गया है.
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में ‘बाना कैह’ योजना लागू करने के लिए 350 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. इसमें 150 करोड़ रुपये पांच प्रमुख फसलों की खरीद के लिए विशेष रूप से रखे गए हैं. सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय किसानों की आय और आजीविका को बढ़ावा देने के साथ समावेशी विकास को गति मिलेगी.
अदरक मिजोरम की प्रमुख कृषि उपज है. नीति आयोग ने 2025 में मिजोरम को ‘भारत की अदरक राजधानी’ के रूप में नामित किया था. राज्य में अदरक की सरकारी खरीद को सत्तारूढ़ जोराम पीपुल्स मूवमेंट के प्रमुख चुनावी वादों में भी शामिल किया गया था. ‘बाना कैह’ योजना के जरिए सरकार अब इस फसल के साथ अन्य प्रमुख कृषि उपज के लिए भी किसानों को बाजार और मूल्य का सहारा देने की कोशिश कर रही है. (पीटीआई)
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