सब्सिडी विवाद में कृषि राज्यमंत्री का नाम सामने आया थानेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) ने 21 अगस्त, 2026 को अपनी स्कीम की गाइडलाइंस में बदलाव किया. इसके तहत संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, मौजूदा मंत्रियों, विधायकों, मेयरों और सरकारी कर्मचारियों, साथ ही उनके करीबी परिवार के सदस्यों को आर्थिक मदद पाने से रोक दिया गया है. जांच में पता चला कि एक केंद्रीय मंत्री और केंद्र सरकार के एक मौजूदा सेक्रेटरी के रिश्तेदारों को NHB स्कीम के तहत कमर्शियल खेती के लिए भारी सब्सिडी मिली थी. इस खुलासे के बाद हितों के टकराव (conflict of interest) को लेकर कड़ा विरोध हुआ, जिसके चलते संबंधित मंत्री को मिली रकम वापस करनी पड़ी.
अब इसमें आवेदक के जीवनसाथी, माता-पिता, बेटे और बेटियां भी शामिल हैं. जिन लोगों को अयोग्य माना गया है, उनमें मौजूदा मंत्री, सांसद (MP), विधायक (MLA), MLC, मेयर, जिला पंचायत प्रमुख और केंद्र/राज्य सरकार के कर्मचारी शामिल हैं.
सामान्य श्रेणी के राज्यों के लिए आर्थिक मदद की सीमा 50% से घटाकर 35% (और पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 45%) कर दी गई है. एक प्रावधान के तहत मौजूदा लाभार्थी चाहें तो सब्सिडी की पूरी रकम ब्याज सहित वापस करके खुद को इस योजना से अलग कर सकते हैं.
'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच में यह पता चला था कि एक केंद्रीय मंत्री और केंद्र सरकार के एक मौजूदा सेक्रेटरी के रिश्तेदारों ने खीरे की खेती के लिए सब्सिडी ली थी. इसके लगभग दो महीने बाद, केंद्र सरकार ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की 'कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज स्कीम' के नियमों में बदलाव किया है.
सरकार ने 'परिवार' की परिभाषा में बदलाव करते हुए सब्सिडी के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के जीवनसाथी, पिता, माता, बेटे और बेटियों को इसके दायरे में शामिल किया है. साथ ही, संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, मौजूदा मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, मेयरों, जिला पंचायत प्रमुखों और सरकारी कर्मचारियों को NHB की स्कीमों के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है.
नए नियम के अनुसार, "लागू प्रावधानों के तहत, NHB स्कीमों के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए परिवार का केवल एक सदस्य ही पात्र होगा, चाहे वह व्यक्तिगत रूप से हो या HUF, पार्टनरशिप/प्रोप्राइटरशिप फर्म या कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर हो."
नई गाइडलाइंस में कहा गया है, "परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा ली गई आर्थिक मदद को उसी परिवार द्वारा ली गई आर्थिक मदद माना जाएगा. एक बार जब आवेदक के परिवार के किसी सदस्य ने किसी NHB स्कीम/घटक के तहत आर्थिक मदद ले ली है, तो उसी परिवार के किसी अन्य सदस्य को किसी भी NHB स्कीम/घटक के तहत कोई और आर्थिक मदद नहीं दी जाएगी, चाहे अधिकतम स्वीकार्य सीमा का कोई हिस्सा इस्तेमाल न हुआ हो."
नई गाइडलाइंस में आगे कहा गया है, "यह प्रतिबंध सभी NHB स्कीमों/घटकों पर लागू होगा और यह परिवार का अंतिम अधिकार होगा." "आर्थिक मदद पाने के लिए जानकारी छिपाने, गलत जानकारी देने या गलत जानकारी उपलब्ध कराने पर आवेदक को दी गई मदद की राशि लागू ब्याज के साथ वापस करनी होगी."
केंद्र सरकार ने सामान्य श्रेणी के राज्यों में लाभार्थियों के लिए सब्सिडी का हिस्सा 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत और पूर्वोत्तर या हिमालयी राज्यों में 45 प्रतिशत कर दिया है.
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