कृषि सेक्‍टर में 2.30 रुपये की वैल्‍यू बना रहा खर्च किया हर 1 रुपया, KCC-MISS योजना पर बोली सरकार

कृषि सेक्‍टर में 2.30 रुपये की वैल्‍यू बना रहा खर्च किया हर 1 रुपया, KCC-MISS योजना पर बोली सरकार

किसान क्रेडिट कार्ड- मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम (KCC-MISS) पर सरकार के हर 1 रुपये के खर्च से खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों में 2.30 रुपये की नेट वैल्यू एडिशन हो रही है. KCC-MISS के तहत अब तक 1.87 लाख करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी दी जा चुकी है.

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कृषि सेक्‍टर में 2.30 रुपये की वैल्‍यू बना रहा खर्च किया हर 1 रुपया, KCC-MISS योजना पर बोली सरकारKCC-MISS स्‍कीम पर सरकार ने दी जानकारी (सांकेतिक तस्‍वीर)

किसान क्रेडिट कार्ड- मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम (KCC-MISS) पर सरकार के हर 1 रुपये के खर्च से खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों में 2.30 रुपये की नेट वैल्यू एडिशन हो रही है. यह दावा इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज (ISEC), बेंगलुरु के थर्ड पार्टी आकलन में किया गया. सरकार ने यह जानकारी सोमवार को लोकसभा में दी. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जवाब में यह रिपोर्ट साझा की. यहां हर 1 रुपये के खर्च से खेती में 2.30 रुपये की आर्थिक बढ़ोतरी से मतलब है कि सरकार ब्याज सब्सिडी में जितना पैसा मदद के रूप में खर्च करती है, उससे खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों में ज्यादा आर्थिक मूल्य पैदा होता है. यानी सस्ते कर्ज की वजह से किसान समय पर खेती का काम कर पाते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने में मदद मिलती है.

ब्याज का बोझ हुआ कम

रिपोर्ट के अनुसार, KCC-MISS योजना ने किसानों पर ब्याज का बोझ कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है. रिपोर्ट में बताया गया कि योजना शुरू होने से लेकर वर्ष 2024-25 तक सरकार ने करीब 1.87 लाख करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी दी है. इससे किसानों को कम ब्याज पर फसल लोन मिल सका.

खेती में हुए बड़े बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक, सस्ते और समय पर मिलने वाले कर्ज से किसानों ने ज्यादा जमीन पर खेती की. कई किसानों ने साल में एक से ज्यादा फसल उगाई. इसके साथ ही किसानों ने अलग-अलग तरह की फसलें अपनाईं, जिससे फसल विविधीकरण बढ़ा. जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध थी, वहां किसानों ने अलग-अलग मौसम में खेती का दायरा भी बढ़ाया. रिपोर्ट में कहा गया कि आसान कर्ज मिलने से किसानों को समय पर बीज, खाद, दवा और खेती के दूसरे जरूरी सामान खरीदने में मदद मिली. इससे खेती का काम सही समय पर पूरा हो सका और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिली.

समय पर कर्ज चुकाने वालों को भी मिला फायदा

योजना के तहत समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को प्रॉम्प्ट रिपेमेंट इंसेंटिव (Prompt Repayment Incentive-PRI) का लाभ मिलता है. रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे किसानों में समय पर कर्ज चुकाने की आदत बेहतर हुई. इससे बैंकों का भरोसा बढ़ा और आगे जरूरत पड़ने पर किसानों को आसानी से कर्ज मिलने में मदद मिली.

रिपोर्ट में बताया गया कि इस योजना से डेयरी और पशुपालन जैसे कामों को बढ़ावा मिला है. इससे किसानों की आमदनी के नए सोर्स बने और उनकी केवल मौसमी फसलों पर निर्भरता कम हुई. पूर्वोत्तर राज्यों में अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में भी इस योजना ने मदद की.

सरकार ने बढ़ाई बिना गारंटी वाले कर्ज की सीमा

सरकार ने संसद में बताया कि किसानों तक संस्थागत कृषि लोन पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. 1 जनवरी 2025 से किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बिना गारंटी मिलने वाले कर्ज की सीमा 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है. इसके अलावा हर साल बैंकों के लिए कृषि लोन का लक्ष्य तय किया जाता है, ताकि ज्यादा किसानों तक सस्ता कर्ज पहुंच सके.

डिजिटल सुविधाओं से कृषि लोन लेना आसान हुआ

सरकार ने किसानों के लिए किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ पोर्टल, ई-केसीसी और कृषिका जैसी डिजिटल सुविधाएं शुरू की हैं. इनका उद्देश्य किसानों को आसान, तेज और पारदर्शी तरीके से कृषि लोन उपलब्ध कराना है. सरकार ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटियां और विभिन्न बैंक मिलकर किसान क्रेडिट कार्ड योजना के बारे में जागरूकता अभियान चला रहे हैं. इन अभियानों का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाना और उन्हें संस्थागत कृषि लोन से जोड़ना है. 

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