राज्यसभा में खुलासे: देश में गोदाम निर्माण में राजस्थान-गुजरात सबसे आगे, जानिए आपके राज्य का क्या है हाल

राज्यसभा में खुलासे: देश में गोदाम निर्माण में राजस्थान-गुजरात सबसे आगे, जानिए आपके राज्य का क्या है हाल

राज्यसभा में सरकार ने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत देशभर में 1,015 प्रोजेक्ट्स मंजूर किए गए हैं. इनमें से 313 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है. राजस्थान और गुजरात इस योजना को लागू करने में सबसे आगे हैं, जबकि कई राज्यों में काम अभी शुरुआती चरण में है.

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राज्यसभा में खुलासे: देश में गोदाम निर्माण में राजस्थान-गुजरात सबसे आगे, जानिए आपके राज्य का क्या है हाल गोदाम निर्माण में सहकारिता विभाग की तेजी (सांकेतिक फोटो-ITG)

केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में 31 मई 2023 को दुनिया की सबसे बड़ी अन्न (अनाज) भंडारण योजना को मंजूरी दी थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य है ग्रामीण स्तर पर किसानों को फसल रखने के लिए बेहतर सुविधा देना, ताकि उन्हें अपनी उपज सहेजने में आसानी हो. 
संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, देश भर में इस योजना के तहत कुल 1,015 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें से अब तक 313 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है. राज्यों की स्थिति को देखने पर साफ पता चलता है कि कुछ राज्यों में काम बहुत तेजी से हो रहा है, जबकि कई राज्यों में यह योजना अभी शुरुआती दौर में या धीमी है.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में इस योजना की प्रगति और उपलब्धियों का ब्योरा साझा किया. 

क्या है यह योजना?

सरकार ने मई 2023 में सहकारी क्षेत्र के अंतर्गत इस बड़ी योजना को मंजूरी दी थी. इसका असली मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में पैक्स (PACS) स्तर पर बड़े गोदाम (सिल्होज/Storage Warehouse), कस्टम हायरिंग सेंटर, प्रोसेसिंग यूनिट और उचित मूल्य की दुकानें बनाना है. इस योजना के लिए अलग से नया बजट बनाने के बजाय भारत सरकार की कई मौजूदा कृषि योजनाओं को एक साथ (Convergence) जोड़ा गया है. इन योजनाओं में प्रमुख रूप से कृषि अवसंरचना निधि (Agricultural Infrastructure Fund - AIF), कृषि विपणन अवसंरचना योजना (AMI), कृषि यांत्रिकीकरण पर उप-मिशन (SMAM), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) शामिल हैं.

योजना की अब तक की प्रगति

राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, देश भर में भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए परियोजनाओं की मंजूरी और निर्माण का काम जारी है. इस योजना के तहत अब तक 1,015 भंडारण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. इनमें से 203 से अधिक परियोजनाओं पर वर्तमान में निर्माण का काम चल रहा है.

किसानों को क्या होगा फायदा?

गोदाम बनने और उसमें उपज रखने से बर्बादी पर रोक लगेगी. स्थानीय स्तर पर गोदाम उपलब्ध होने से अनाज के सड़ने या खराब होने की समस्या खत्म होगी. किसानों को मजबूरी में बिक्री (Distress sale) से राहत मिलेगी. किसानों को फसल कटाई के तुरंत बाद सस्ते दामों में अनाज बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा. वे गोदाम में अनाज रखकर सही दाम मिलने पर बेच सकेंगे. पैक्स स्तर पर ही कस्टम हायरिंग सेंटर और प्रोसेसिंग यूनिट मिलने से किसानों के ढुलाई और प्रोसेसिंग का खर्च कम होगा.

किस राज्य में निर्माण का क्या है हाल?

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, योजना के तहत देशभर में गोदाम निर्माण का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन राज्यों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान और गुजरात इस योजना को लागू करने में सबसे आगे हैं, जबकि तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कुछ पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में प्रगति कुछ धीमी बनी हुई है. अब तक की उपबल्धियों की बात करें तो इसमें आंध्र प्रदेश सबसे आगे है क्योंकि 117 गोदाम मंजूर किए गए थे जिसमें सभी 117 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है. अभी वहां गोदाम निर्माण की कोई परियोजना नहीं चल रही है.

सबसे बेहतर काम गुजरात का रहा है. राज्य में योजना के तहत 275 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इनमें से 44 गोदाम बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 84 परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है. इससे स्पष्ट है कि राज्य में योजना को तेजी से जमीन पर उतारा जा रहा है.

वहीं राजस्थान निर्माण कार्य पूरा करने के मामले में देश में सबसे आगे है. राज्य को 201 परियोजनाओं की मंजूरी मिली है, जिनमें से 121 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है. इसके अलावा 80 गोदाम निर्माणाधीन हैं. तैयार परियोजनाओं की संख्या के लिहाज से राजस्थान अन्य सभी राज्यों से आगे निकल चुका है.

इन राज्यों में धीमी है प्रगति

दूसरी ओर, कुछ राज्यों में योजना की रफ्तार संतोषजनक नहीं है. तेलंगाना में 28 परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक किसी भी परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है. राज्य में न तो कोई गोदाम तैयार हुआ है और न ही कोई निर्माणाधीन है. उत्तर प्रदेश में भी योजना शुरुआती चरण में दिखाई दे रही है. राज्य को 14 परियोजनाओं की मंजूरी मिली है, लेकिन अब तक केवल एक गोदाम का निर्माण पूरा हो सका है. इससे पता चलता है कि मंजूरी के मुकाबले जमीनी प्रगति काफी धीमी है.

इसी तरह जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी निर्माण का काम अभी गति नहीं पकड़ सका है. जम्मू-कश्मीर में मंजूर 6 परियोजनाओं में से केवल 3 निर्माणाधीन हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में 3 परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बावजूद अभी तक कोई गोदाम पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है.

सरकार के ये आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान और गुजरात ने सहकारिता क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना को लागू करने में बड़ी प्रगति की है. वहीं कई राज्यों में मंजूरी मिलने के बाद भी निर्माण का काम धीमी गति से आगे बढ़ रहा है. योजना का उद्देश्य किसानों को गांव स्तर पर आधुनिक भंडारण सुविधा उपलब्ध कराना है, इसलिए आने वाले समय में पिछड़े राज्यों में निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ाना बड़ी चुनौती होगी.

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