सोलर कृषि पंप (सांकेतिक तस्वीर)कर्नाटक सरकार ने कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ी प्रगति दर्ज की है. राज्य में अब तक 27,700 से अधिक सोलर कृषि पंप सेट लगाकर कर उन्हें चालू किया जा चुका है. वहीं, एक लाख से ज्यादा किसानों ने सौर कृषि पंप लगाने के लिए आवेदन किया है. राज्य अब 40,000 सौर कृषि पंप सेट लगाने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है. अधिकारियों ने बताया कि इन सौर कृषि पंपों के चालू होने से राज्य की बिजली ग्रिड पर करीब 144 मेगावाट का भार कम हुआ है. साथ ही हर साल लगभग 240 मिलियन यूनिट बिजली खरीदने की जरूरत भी कम होगी. इससे बिजली वितरण कंपनियों (ESCOMs) को बिजली खरीद पर करीब 146 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत होने का अनुमान है.
ऊर्जा विभाग के मुताबिक, सौर कृषि पंपों के बढ़ते इस्तेमाल से राज्य सरकार की कृषि पंपों पर दी जाने वाली बिजली सब्सिडी का बोझ भी कम होगा. अनुमान है कि इससे सरकार को हर साल 200 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी. इस योजना के तहत किसानों को सौर कृषि पंप लगाने के लिए 50 प्रतिशत वित्तीय सहायता भी दी जा रही है, जिससे किसान कम लागत में सौर ऊर्जा अपना पा रहे हैं.
अधिकारियों ने बताया कि योजना के शुरुआती वर्षों में इसकी प्रगति धीमी रही थी. हालांकि, ऊर्जा मंत्री के. जे. जॉर्ज के खास ध्यान देने से, लगातार निगरानी और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद इसकी रफ्तार बढ़ी है. ऊर्जा विभाग, बिजली वितरण कंपनियों, कार्यान्वयन एजेंसियों और उपकरण सप्लायर्स के बीच बेहतर समन्वय से पहले आ रही कई बाधाओं को दूर किया गया, जिसके बाद किसानों की भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई.
अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना (PM-KUSUM) के प्रोग्राम-बी के तहत लगाए गए सौर कृषि पंप किसानों के लिए कई तरह से लाभकारी साबित हो रहे हैं. दिन के समय भरोसेमंद बिजली उपलब्ध होने से किसानों को रात में खेत जाकर पंप चालू करने या पूरी रात सिंचाई की निगरानी करने की जरूरत नहीं रहती. इससे किसानों की सुरक्षा, सुविधा और कार्यक्षमता में सुधार हुआ है.
वहीं, कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री के. जे. जॉर्ज ने कहा कि राज्य की सौर कृषि पहल टिकाऊ खेती और सुशासन का नया मॉडल तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार ने योजना को चलाने के लिए मौजूद बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर किया, प्रक्रिया को सरल बनाया और कार्यक्रम को नई गति दी.
उन्हाेंने आगे कहा कि लगाया गया हर सौर कृषि पंप कर्नाटक के भविष्य में स्थायी निवेश है. इससे राज्य की बिजली खरीद लागत कम होगी, बिजली सब्सिडी का बोझ घटेगा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और किसानों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा. (पीटीआई)
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