चाय का बागान. (फाइल फोटो)बिहार के सीमांचल क्षेत्र में चाय की खेती किसानों के लिए धीरे-धीरे कमाई का अच्छा जरिया बनती जा रही है. देश में सबसे ज्यादा चाय उत्पादन करने वाले पांच राज्यों में बिहार भी शामिल है. राज्य में किशनगंज चाय उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है. अब बिहार सरकार चाय की खेती को बढ़ावा देने के लिए पूर्णिया और कटिहार जिलों में भी इसका विस्तार कर रही है. इसके लिए चाय विकास योजना के तहत इस साल 6.55 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. हालांकि, पहले से चाय की खेती कर रहे किसानों का कहना है कि बदलते मौसम और सरकारी मदद की कमी के कारण चाय की खेती करना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह योजना सीमांचल में कृषि विविधीकरण को नई गति देने के साथ-साथ किसानों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार करेगी. उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए परंपरागत खेती के साथ नकदी फसलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार काम कर रही है और इसी कड़ी में चाय की खेती के विस्तार को लेकर योजना की शुरुआत की गई है. उन्होंने कहा कि सीमांचल की जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियां चाय की खेती के लिए बिल्कुल अनुकूल है. सरकार इस क्षेत्र की प्राकृतिक क्षमता का अधिकतम उपयोग कर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है.
कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि चाय विकास योजना को पूरी ईमानदारी और तय समय के भीतर लागू किया जाए, ताकि इसका लाभ जल्द से जल्द योग्य किसानों तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि योजना के सभी लक्ष्य समय पर पूरे किए जाएं. कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि इस योजना से किसानों की आय बढ़ेगी और सीमांचल क्षेत्र की पहचान देश के उभरते चाय उत्पादक इलाके के रूप में और मजबूत होगी.
किशनगंज जिले के रहने वाले चाय किसान जैमिनी कृष्णा और राजेश अनुराग कहते हैं कि हाल के समय में बदलते मौसम की वजह से चाय की खेती पर सीधा असर पड़ा है. रोगों और कीटों का प्रकोप बढ़ने से खेती लागत में इजाफा हुआ है, जबकि उत्पादन में कमी आई है, करीब 60 फीसदी ही इस साल उत्पादन हो पाया है. वहीं, सरकार जहां चाय की खेती के विस्तार को लेकर योजनाएं चला रही है, लेकिन जो किसान पहले से चाय की खेती कर रहे हैं, उनके लिए सरकार की ओर से कौन-सी योजनाएं चलाई जा रही हैं, इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है. साथ ही, चाय फैक्ट्रियों की मनमानी अपने चरम पर है. हालत यह है कि न तो चाय किसानों के लिए मौसम अनुकूल है और न ही सरकारी स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं.
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