
करनाल मंडी में होने लगी धान की आवकहरियाणा में धान की फसल पककर पूरी तरह तैयार हो चुकी है. अब किसान जल्द ही अपनी उपज लेकर प्रदेश की अनाज मंडियों में पहुंचेंगे. धान की सरकारी खरीद को लेकर सरकार और जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. खरीद व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ ही किसानों को मंडियों में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को सक्रिय किया जा रहा है. धान उत्पादन के लिए मशहूर करनाल को धान का कटोरा भी कहा जाता है. जिले में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं, इसलिए यहां धान खरीद की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
हरियाणा विधानसभा स्पीकर हरविंदर कल्याण ने धान खरीद की तैयारियों को लेकर कहा कि सरकार समय-समय पर व्यवस्थाओं की निगरानी और समीक्षा करती है. उन्होंने बताया कि दो दिन पहले जिला उपायुक्त ने धान खरीद को लेकर राइस मिलर्स, आढ़तियों और किसानों के साथ संयुक्त बैठक की थी. इस बैठक में खरीद के दौरान आने वाली संभावित समस्याओं पर चर्चा की गई. इसका उद्देश्य धान खरीद शुरू होने के बाद किसानों, आढ़तियों और अन्य संबंधित पक्षों को किसी तरह की परेशानी से बचाना है.

स्पीकर हरविंदर कल्याण ने कहा कि सरकार लगातार न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर फसलों की खरीद का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि धान खरीद के दौरान व्यवस्थाओं में कई बार दिक्कतें आती हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों का सहयोग जरूरी है. सरकार, प्रशासन, राइस मिलर्स, आढ़तियों और किसानों के सामूहिक सहयोग से ही खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है.
धान खरीद को लेकर सरकार और प्रशासन की तैयारियों के बीच अब किसानों को मंडियों में सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार है. विधानसभा स्पीकर ने भरोसा दिया कि खरीद के दौरान किसानों को किसी भी तरह की समस्या आती है, तो अधिकारियों द्वारा उसका तुरंत समाधान किया जाएगा. प्रशासन की बैठकों और तैयारियों का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाना है, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी न हो.
हालांकि, सरकारी तैयारियों के बावजूद धान खरीद शुरू होने के बाद जमीनी हकीकत क्या रहती है, यह देखने वाली बात होगी. पिछले कुछ वर्षों में धान और गेहूं की खरीद के दौरान प्रदेश की मंडियों में किसानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. किसानों की फसल एमएसपी से कम दाम पर खरीदे जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं. ऐसे में इस बार मंडियों में खरीद व्यवस्था, किसानों को मिलने वाला वास्तविक भाव और सरकारी दावों का क्रियान्वयन महत्वपूर्ण रहेगा.
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