फार्मर आईडी में राजस्थान ने बनाया बड़ा रिकॉर्डराजस्थान ने किसानों को डिजिटल कृषि व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. राज्य ने केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी बनाने का लक्ष्य 100 प्रतिशत पूरा कर लिया है. इसके साथ ही राजस्थान किसान आईडी का पूरा लक्ष्य हासिल करने वाला उत्तर भारत का पहला और देश का छठा राज्य बन गया है.
राज्य सरकार का कहना है कि राजस्व और कृषि विभाग की साझा उपलब्धि हासिल हुई है. किसान आईडी तैयार करने में आधार, जमीन का रिकॉर्ड और किसानों की दूसरी जरूरी जानकारी को डिजिटल रूप से जोड़ने का काम किया गया है.
इस व्यवस्था का मकसद किसानों को सरकारी मंजूरी और कृषि सेवाओं का लाभ सबसे ज्यादा आसान, जरूरी और समय पर उपलब्ध कराना है.
एग्रीस्टैक कृषि क्षेत्र के लिए तैयार किया जा रहा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर है. इसके जरिए किसानों, उनकी कृषि भूमि और फसलों से जुड़ी वेरिफाइड जानकारियों को एक साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है.
किसान ID के जरिए किसान की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान तैयार होती है, जिसे उसकी कृषि भूमि से जोड़ा जाता है. भविष्य में इसका इस्तेमाल योजनाओं के लिए किसान की पात्रता की पहचान करने और सरकारी सेवाओं को सही किसान तक पहुंचाने में किया जा सकेगा.
इसके अलावा कृषि लोन, बीज-खाद जैसे कृषि इनपुट, फसल से जुड़ी सलाह और बाजार सेवाओं को किसानों तक पहुंचाने में भी डिजिटल रिकॉर्ड मददगार साबित हो सकता है.
राजस्थान में किसान ID और एग्रीस्टैक डेटा को कई कृषि योजनाओं और सेवाओं के साथ जोड़ने की तैयारी की गई है.
जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर किसान को खाद की कितनी जरूरत है, इसका आकलन करने और उसके मुताबिक खाद वितरण में इसका उपयोग किया जा सकता है. इसी तरह ड्रोन से नैनो लिक्विड यूरिया के इस्तेमाल के लिए सही लाभार्थियों की पहचान में भी इससे मदद मिल सकती है.
माइक्रो इरिगेशन, फार्म पौंड, बाड़बंदी और कृषि उपकरण जैसी योजनाओं के पात्र किसानों की पहचान करने में भी डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा सकेगा.
प्रमाणित बीज, खाद और कीटनाशक जैसी कृषि सामग्री का वितरण भी किसानों की जरूरत के मुताबिक करने में इससे मदद मिलने की उम्मीद है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में डिजिटल क्रॉप सर्वे के आंकड़ों को किसान ID और जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ने पर फसल और उसके क्षेत्रफल की ज्यादा सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी. इससे आगे चलकर बीमा क्लेम प्रक्रिया को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है.
राज्य में किसान ID को पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, खाद वितरण और न्यूनतम मूल्य पर सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम किया गया है.
इससे किसान की पहचान और उसकी जमीन की जानकारी पहले से उपलब्ध होने पर अलग-अलग योजनाओं के लिए दस्तावेज देने की प्रक्रिया आसान हो सकती है.
राजस्थान में पीएम-किसान के करीब 50 लाख लाभार्थियों को किसान ID से जोड़ा जा चुका है. वहीं, प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा किसान ID के तहत कवर किया गया है.
राज्य के करीब 99 प्रतिशत गांवों की जियो-रेफरेंसिंग का काम भी पूरा हो चुका है.
डिजिटल कृषि की दिशा में रबी 2025-26 के दौरान राजस्थान में 2.72 करोड़ से अधिक भू-खंडों का डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया. इससे खेत में कौन-सी फसल उगाई जा रही है, जैसी जानकारियों को डिजिटल तरीके से दर्ज करने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है.
राजस्थान में किसान ID को आधार डेटाबेस के साथ जोड़ा गया है. इसके अलावा जन आधार से भी इसे लिंक किया जा रहा है.
राज्य में करीब 83 लाख किसानों की किसान ID को जन आधार से लिंक किया जा चुका है. इससे किसान की पहचान को अलग-अलग सरकारी डेटाबेस से जोड़ने और योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान आसान बनाने में मदद मिलेगी.
डिजिटल कृषि व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान में कृषि विभाग के तहत एग्रीस्टैक आयुक्तालय बनाया जा रहा है. कृषि आयुक्त को इसका आयुक्त नामित किया गया है.
एग्रीस्टैक के डेटा को API के जरिए अलग-अलग विभागों की योजनाओं और कार्यक्रमों से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल राज किसान साथी पोर्टल की कृषि योजनाओं में भी किया जा रहा है.
90.19 लाख किसान ID का लक्ष्य पूरा करने के बावजूद राज्य सरकार बाकी पात्र किसानों को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना चाहती है. इसके लिए 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक प्रदेशव्यापी किसान ID अभियान चलाया गया.
अभियान के तहत छूटे हुए किसानों और पीएम-किसान लाभार्थियों को किसान ID से जोड़ने पर जोर दिया गया. इसके अलावा म्यूटेशन के समय आधार नंबर लेने, पात्र वन क्षेत्र निवासियों को इसमें शामिल करने और कृषि पर्यवेक्षकों के माध्यम से किसानों तक पहुंचने जैसे कदम उठाए गए.
राज्य सरकार का मानना है कि किसान की डिजिटल पहचान को जमीन और फसल के सत्यापित रिकॉर्ड के साथ जोड़ने से आने वाले समय में फसल बीमा, खाद वितरण, पीएम-किसान, सरकारी खरीद और दूसरी कृषि योजनाओं का लाभ अधिक लक्षित तरीके से किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.
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