नागौर में फसल बीमा घोटाले का पर्दाफाशप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के नाम पर किसानों के साथ कथित धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का नागौर पुलिस ने खुलासा किया है. शुरुआती जांच एक किसान के 4.70 लाख रुपये के क्लेम से शुरू हुई थी, लेकिन अब मामला कई जिलों तक फैले संगठित फर्जीवाड़े की शक्ल लेता नजर आ रहा है. पुलिस अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और 9 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं.
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने किसानों की जमीन के खसरा नंबर, नाम-पता और अन्य निजी जानकारी जुटाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए. इसके बाद नकली फसल बीमा पॉलिसियां बनाकर क्लेम की रकम वास्तविक किसानों के बजाय अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी.
मामला 13 अगस्त 2026 को सामने आया, जब डूजासर निवासी राजेश ने पांचौड़ी थाने में शिकायत दर्ज करवाई. शिकायत के अनुसार उनकी पत्नी सुमित्रा के नाम दर्ज भूमि पर बिना जानकारी के फसल बीमा कराया गया और क्लेम की 4 लाख 70 हजार 168 रुपये की राशि किसी अन्य व्यक्ति के खाते में पहुंच गई.
पुलिस जांच में पता चला कि यह कोई अकेला मामला नहीं था. जांच आगे बढ़ने पर किसानों की जमीन और खसरा नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी बीमा क्लेम लेने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ.
जिला पुलिस अधीक्षक आसाराम चौधरी के अनुसार गिरोह मुख्य रूप से तीन तरीकों से किसानों को निशाना बनाता था. किसानों के नाम से मिलते-जुलते बैंक खातों में बीमा राशि ट्रांसफर कराना, फर्जी बटाईदार अनुबंध तैयार कर बीमा क्लेम लेना और असली किसान के खाते में राशि आने के बाद उसे डरा-धमकाकर रकम वसूलना.
पुलिस का कहना है कि गिरोह किसानों के जाली हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार करता था और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का भी उपयोग करता था.
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उपखंड अधिकारी (SDM), तहसीलदार और कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों के नाम से कथित फर्जी स्टांप, सील, मूल निवास प्रमाण पत्र और बीमा फॉर्म बरामद किए हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी रिकॉर्ड और किसानों की व्यक्तिगत जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची.
मामले में बीमा कंपनी से जुड़े तीन अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया है. इनमें क्लस्टर कोऑर्डिनेटर आदित्य पाटोदिया, जिला कोऑर्डिनेटर अक्षय कुमार और तहसील कोऑर्डिनेटर विनीत कुमार दुबे शामिल हैं. पुलिस इनकी भूमिका की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी क्लेम की रकम किन-किन खातों में भेजी गई.
इसी बीच जायल क्षेत्र में फसल बीमा क्लेम से जुड़े एक और मामले ने जांच को नया मोड़ दे दिया है. मंगीलाल की शिकायत पर सरकारी वकील बीरबलराम कमेडिया, उनकी पत्नी बसंती देवी और भाई किशनराम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
शिकायत के अनुसार खातेदारी भूमि के दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर फर्जी बटाईदार दिखाया गया और वर्ष 2021 में मूंग की फसल का बीमा करवाकर 2.28 लाख रुपये का क्लेम प्राप्त किया गया. पुलिस अब जमीन के रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और बीमा क्लेम प्रक्रिया की जांच कर रही है.
पुलिस का मानना है कि फर्जीवाड़ा केवल कुछ मामलों तक सीमित नहीं है. अलग-अलग थानों में सामने आए मामलों को देखते हुए क्लेम घोटाले की राशि करोड़ों रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कितने किसानों के खसरा नंबरों का दुरुपयोग हुआ और कितनी फर्जी पॉलिसियां बनाई गईं.
नागौर जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव ने बताया कि सरकारी वकील से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर की कॉपी राज्य सरकार को भेजी जा रही है. आपराधिक जांच पुलिस करेगी, जबकि सरकारी वकील के रूप में उनकी भूमिका से जुड़े पहलुओं पर राज्य सरकार आगे निर्णय लेगी.
फिलहाल नागौर पुलिस, एसओजी, डीएसटी और साइबर सेल संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि किसानों से जुड़े इस फर्जीवाड़े की हर कड़ी तक पहुंचने के लिए बैंक खातों, मोबाइल डेटा, डिजिटल रिकॉर्ड और बीमा पोर्टल की गहन पड़ताल की जा रही है.
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