
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार किसानों को 'अन्नदाता' से 'उद्यमी' बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' के रूप में मनाते हुए सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए बजट में बड़ा ऐलान किया है. इसका सीधा फायदा जमीन पर दिखने लगा है। रायसेन जिले के गैरतगंज के किसान महेश रघुवंशी इसकी मिसाल बन गए हैं.
पहले परंपरागत खेती से बेहद कम आमदनी कमाने वाले महेश रघुवंशी ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) की मदद से अपनी तकदीर बदल दी है. आज वे 'वेदांश ओवर सीज फ्लोर मिल' के मालिक हैं और महीने में 80 से 90 हजार रुपये कमा रहे हैं.
गैरतगंज के रहने वाले महेश रघुवंशी पिता तुलसीराम रघुवंशी बताते हैं, "पहले मैं सिर्फ परंपरागत खेती करता था.लागत ज्यादा, मुनाफा कम,मौसम की मार अलग. साल भर मेहनत के बाद भी घर चलाना मुश्किल था." तभी उन्हें सरकार की PMFME योजना के बारे में पता चला.उन्होंने तुरंत गैरतगंज विकासखण्ड के उद्यानिकी कार्यालय में सुरेन्द्र रघुवंशी से संपर्क किया. यहां से उन्हें योजना की पूरी जानकारी और मार्गदर्शन मिला.
महेश ने आटा उद्योग लगाने का फैसला किया और PMFME योजना के तहत आवेदन किया. भारतीय स्टेट बैंक से उनका लोन स्वीकृत हुआ. योजना के तहत उन्हें लागत पर 35% अनुदान सहायता भी मिली. इस मदद से उन्होंने आधुनिक मशीनों के साथ अपनी आटा मिल यूनिट स्थापित की, जिसका ब्रांड नाम रखा 'वेदांश ओवर सीज फ्लोर मिल'.
महेश रघुवंशी ने बताया कि आधुनिक मशीनों से वे रोजाना 30 से 35 क्विंटल उच्च गुणवत्ता का आटा और दलिया का उत्पादन कर रहे हैं.उनके प्रोडक्ट 'वेदांश ओवर सीज फ्लोर मिल' के नाम से गैरतगंज, रायसेन, भोपाल और आसपास के बाजारों में हाथों-हाथ बिक रहे हैं. इससे उनकी मासिक आय 80 से 90 हजार रुपये हो गई है.साथ ही उन्होंने 8-10 स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया है.
कृषक कल्याण वर्ष 2026 में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में समावेशी विकास के लिए राज्य सरकार ने 2026-27 के बजट में PMFME योजना के तहत 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. यह राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनुमान 169.11 करोड़ से 18.25% अधिक है. सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा किसान और युवा इस योजना से जुड़कर खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाएं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आभार जताते हुए महेश कहते हैं, "PMFME योजना हम जैसे छोटे किसानों और युवाओं के लिए वरदान है. इसने मुझे सिर्फ आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया, बल्कि दूसरों को रोजगार देने लायक भी बनाया है. मेरी अपील है कि युवा खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग यूनिट लगाएं. सरकार पूरा साथ दे रही है. रायसेन जिले में महेश जैसे कई युवा इस योजना का लाभ लेकर सफल उद्यमी बन रहे हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं.
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