10 हजार पौधों से शुरू किया सफर, आज हर महीने 15 लाख पौधे तैयार कर रहे किसान भाई!

10 हजार पौधों से शुरू किया सफर, आज हर महीने 15 लाख पौधे तैयार कर रहे किसान भाई!

भोपाल के रतुआ रतनपुर गांव के किसान भाई हेमंत और ओम कुशवाह ने महज 10 हजार पौधों से नर्सरी की शुरुआत की थी. आज उनकी आधुनिक नर्सरी में हर महीने करीब 15 लाख फूल और सब्जियों के पौधे तैयार हो रहे हैं. महाराष्ट्र, यूपी, दिल्ली व राजस्थान तक पौधों की सप्लाई कर रहे हैं.

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10 हजार पौधों से शुरू किया सफर, आज हर महीने 15 लाख पौधे तैयार कर रहे किसान भाई!

मध्यप्रदेश के भोपाल जिले के छोटे से गांव रतुआ रतनपुर के किसान भाई हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह ने मेहनत, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती-किसानी में एक नई मिसाल कायम की है. कभी महज 10 हजार पौधों से नर्सरी की शुरुआत करने वाले दोनों भाइयों की मेहनत आज उन्हें उस मुकाम तक ले गई है, जहां उनकी आधुनिक नर्सरी में हर महीने करीब 15 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं.

उनकी सफलता सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने तक सीमित नहीं है.उनकी नर्सरी से आसपास के 15 से 20 ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है.फूलों और सब्जियों की गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार कर वे मध्यप्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के किसानों तक भी पौधे पहुंचा रहे हैं.

2017-18 में शुरू हुई नई राह

हेमंत और ओम कुशवाह की सफलता की कहानी वर्ष 2017-18 से शुरू होती है. इसी दौरान उनका संपर्क कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से हुआ.विभाग की ओर से आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने हिस्सा लेना शुरू किया.

प्रशिक्षण के दौरान दोनों भाइयों ने आधुनिक कृषि तकनीक, नर्सरी प्रबंधन, पौध उत्पादन और संरक्षित खेती की बारीकियां सीखीं. इन जानकारियों को उन्होंने अपने खेत में प्रयोग करना शुरू किया और धीरे-धीरे नर्सरी व्यवसाय को विस्तार दिया.

2 हजार वर्गफीट से शुरू की पॉलीहाउस नर्सरी

वर्ष 2018 में उन्होंने अपने खेत में लगभग 2 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में पॉलीहाउस नर्सरी की शुरुआत की. शुरुआत आसान नहीं थी. सबसे बड़ी चुनौती पानी की थी.

पानी की समस्या के बावजूद दोनों भाइयों ने हिम्मत नहीं छोड़ी. उन्होंने खुद कुएं की खुदाई कर जल स्रोत विकसित किया और धीरे-धीरे नर्सरी का विस्तार करते गए.आज उनकी लगभग 8 एकड़ भूमि सिंचित है.

MIDH योजना से मिला बड़ा सहारा

नर्सरी को बड़े स्तर पर विकसित करने में सरकारी योजना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वर्ष 2024 में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की MIDH योजना के अंतर्गत उन्हें लगभग 45 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ.

इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने नर्सरी का विस्तार किया. वर्तमान में करीब 2 एकड़ क्षेत्रफल में नर्सरी संचालित हो रही है और लगभग 4 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में दो पॉलीहाउस स्थापित किए गए हैं.

हर महीने 15 लाख पौधों का उत्पादन

आज यह नर्सरी बड़े पैमाने पर फूल और सब्जियों की पौध तैयार कर रही है. यहां गुलाब, जरबेरा, गेंदा और नौरंगा जैसे फूलों की पौध के साथ विभिन्न सब्जियों के गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार किए जाते हैं.

सब्जियों में बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरा जैसी फसलों के हाईब्रिड पौध तैयार किए जा रहे हैं.शुरुआत में महज 10 हजार पौधों से शुरू हुआ यह सफर आज करीब 15 लाख पौधों के मासिक उत्पादन तक पहुंच चुका है.

MP से महाराष्ट्र, UP और दिल्ली तक पहुंच रहे पौधे

ओम नर्सरी में तैयार पौधों की मांग अब सिर्फ स्थानीय किसानों तक सीमित नहीं है. मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के किसान भी यहां से पौधे खरीद रहे हैं.उन्नत किस्मों में सेमिनिस, फेजेंटा और अंकुर बीएनआर जैसी किस्मों की पौध भी किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है.

सोशल मीडिया ने बढ़ाया बाजार

हेमंत और ओम ने अपने कारोबार को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाने के साथ डिजिटल माध्यम का भी इस्तेमाल किया.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मोबाइल के जरिए देशभर के किसान उनसे संपर्क कर रहे हैं और अपनी जरूरत के अनुसार पौध खरीद रहे हैं.इससे उनकी नर्सरी का बाजार गांव और जिले की सीमाओं से निकलकर दूसरे राज्यों तक पहुंच गया है.

किसानों के लिए बड़ा संदेश

हेमंत कुशवाह का मानना है कि खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीके से करने के बजाय किसान अगर नई तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल करें तो कृषि को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है.उनका कहना है कि किसान भाई ओम नर्सरी से सीधे पौधे प्राप्त कर सकते हैं. दोनों भाई लगातार नए प्रशिक्षणों में हिस्सा लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.

मेहनत और सरकारी योजनाओं से बदली तस्वीर

हेमंत और ओम कुशवाह अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित किसान एवं उद्यानिकी योजनाओं को भी देते हैं.उनकी कहानी बताती है कि यदि किसान मेहनत, तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़कर आगे बढ़े, तो खेती और उससे जुड़े व्यवसाय आय का मजबूत जरिया बन सकते हैं.

रतुआ रतनपुर के इन दोनों किसान भाइयों ने छोटी शुरुआत को बड़े उद्यम में बदलकर यह साबित कर दिया है कि 10 हजार पौधों से शुरू किया गया सफर लाखों पौधों के उत्पादन तक पहुंच सकता है. उनकी सफलता आज मध्यप्रदेश के दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है.

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