कृषि लोनहरियाणा में कृषि ऋण (Agriculture Loan) में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक दिक्कतों को दूर करने के मकसद से एक बड़े सुधार होने जा रहा है. हरियाणा सरकार एक पारदर्शी, टेक्नोलॉजी पर आधारित ग्रामीण क्रेडिट सिस्टम शुरू करने जा रही है, जिससे किसानों को लोन से जुड़े दस्तावेजीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) के लिए बैंकों और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा. यह जानकारी राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने दी.
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही भारत के सबसे एडवांस्ड इंटीग्रेटेड फार्म क्रेडिट सिस्टम में से एक को विकसित करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ एक एमओयू साइन करेगी. इस फ्रेमवर्क के तहत, एग्री लोन की मंजूरी सीधे डिजिटाइज्ड जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी होगी, जिससे वित्तीय संस्थानों और राजस्व प्रशासन के बीच बिना किसी रुकावट के को-ऑर्डिनेशन पक्का होगा.
डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह नया सिस्टम जिस तरह से कृषि क्रेडिट दिया जाता है, उसमें एक बड़ा बदलाव है. उन्होंने बताया कि अब किसानों को लोन लेने के लिए सिर्फ अपने आधार नंबर की जरूरत होगी, क्योंकि जमीन से जुड़ी सभी जानकारी राज्य के डिजिटल रिकॉर्ड से अपने आप मिल जाएगी.
“यह सिर्फ एक प्रौद्योगिकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि किसानों के लिए सार्वजनिक सेवा वितरण का पूरी तरह से नया तरीका है. उन्होंने कहा ‘पटवारी-तहसील-बैंक का जो पुराना सिस्टम था, जिसकी वजह से देरी होती थी, उसे खत्म कर दिया जाएगा.
यह प्रोजेक्ट दो चरणों में लागू किया जाएगा. पहले चरण में किसान क्रेडिट कार्ड लोन पर ध्यान दिया जाएगा, जो हरियाणा में खेती के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला क्रेडिट साधन है.
आधार प्रमाणीकरण के बाद, जमीन का विवरण अपने आप मिल जाएगा, लोन से जुड़ी एंट्रीज अपने आप जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएंगी और भुगतान करने पर गिरवी की एंट्रीज तुरंत हटा दी जाएंगी. यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय दखल के काम करेगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता आएगी.
वहीं, दूसरे चरण में, इस सिस्टम को बढ़ाकर सभी तरह के कृषि और ग्रामीण लोन को शामिल किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य में एक यूनिफाइड डिजिटल क्रेडिट इकोसिस्टम बनेगा. उन्होंने कहा कि इस पहल से सभी स्टेकहोल्डर्स को काफी फायदे होंगे. किसानों का समय बचेगा, उन्हें तेजी से क्रेडिट मिलेगा और लोन स्टेटस और जमीन के रिकॉर्ड की रियल-टाइम ट्रैकिंग से पूरी पारदर्शिता मिलेगी.
बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों को रियल टाइम में वेरिफाइड जमीन का डेटा मिलेगा, जिससे धोखाधड़ी वाले आवेदनों से जुड़े जोखिम कम होंगे और परिचालन क्षमता (ऑपरेशनल एफिशिएंसी) बेहतर होगी. राजस्व प्रशासन को खुद-ब-खुद अपडेट होने वाले रिकॉर्ड, कम गलतियों और जमीन के रिकॉर्ड की बेहतर विश्वसनीयता से फायदा होगा.
राजस्व रिकॉर्ड और लोन देने वाली संस्थाओं के बीच रियल-टाइम इंटीग्रेशन धोखाधड़ी और गलत कामों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगा. उन्होंने कहा कि जाली दस्तावेजों या पुराने रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने की कोई भी कोशिश सिस्टम द्वारा अपने आप पकड़ ली जाएगी, जिससे लोन देने वालों और असली किसानों दोनों की सुरक्षा होगी.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today