गुजरात सरकार ने बिजली ट्रांसमिशन टावर और पावर लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए नई मुआवजा नीति लागू करने का फैसला किया है. अब किसानों को 'जंत्री' दर के बजाय जमीन के मौजूदा बाजार भाव के आधार पर मुआवजा मिलेगा. जमीन का मूल्य निर्धारण करने के लिए मार्केट रेट कमेटी (MRC) बनाई जाएगी, जिसमें किसान प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा. नई नीति के तहत टावर क्षेत्र का दायरा बढ़ाया गया है, 100 प्रतिशत मुआवजा अग्रिम देने का प्रावधान किया गया है और राइट-ऑफ-वे (RoW) कॉरिडोर के लिए भी बाजार आधारित मुआवजा तय किया गया है.
गुजरात सरकार की किसान सूर्योदय योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिसके तहत अब उन्हें रात की बजाय दिन में बिजली मिल रही है. कच्छ के कुकमा गांव के किसान अरविंदभाई आहीर ने बताया कि पहले रात में बिजली मिलने से सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों का डर रहता था और काम भी प्रभावित होता था. अब दिन में 8 से 10 घंटे बिजली मिलने से खेती का काम सुरक्षित और तेज हो गया है. किसानों के अनुसार, दिन में बिजली आपूर्ति से उत्पादकता बढ़ी है और वे बेहतर तरीके से खेती कर पा रहे हैं, जिससे यह योजना गांवों में बड़ी राहत लेकर आई है.
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