असम में फूड प्रोसेसिंग की पहलअसम में कारबी आंगलोंग स्वायत्त परिषद और एर्डे एग्रो इकोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए अहम समझौते के बाद अब जमीनी स्तर पर काम तेजी से शुरू हो गया है. इस पीपीपी मॉडलके तहत बनी नई संस्था 'हिल्स एग्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (HADCL) के सभी निदेशकों की पहली प्रत्यक्ष बोर्ड मीटिंग हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न हुई. यह बैठक इसलिए बहुत महत्वपूर्ण थी क्योंकि दोनों पक्षों के बीच हुए इस शानदार करार के बाद से ही क्षेत्र के किसानों को काफी उम्मीदें बंध गई हैं. इस पहली मीटिंग में सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर इस बात पर गहन चर्चा की कि कारबी आंगलोंग इलाके में खेती और किसानी को कैसे एक नए मुकाम पर ले जाया जाए.और आने वाले कल में एक किसान के आमदनी बढ़ाने के लिए मजबूत नींव रखने वाला कदम साबित हो.
इसकी पहली बैठक में सबसे अहम फैसला HADCL के नए बोर्ड नेतृत्व की औपचारिक घोषणा का रहा. कारबी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के प्रधान सचिव श्री दिलीप तेरांग को इस संस्था का नया चेयरमैननियुक्त किया गया है, जबकि एर्ड एग्रो के अनुभवी निदेशक संजीव मसालिया को प्रबंध निदेशक एमडी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. कृषि विकास और नीतिगत फैसलों को तेज गति देने के लिए बोर्ड में कई जानकारों और विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है. इनमें सुकृत मेहता, डॉ. रविशंकर आनंद, शैलेश कुमार सिंह, नोबिन तेरांग, मेलिना तेरांगपी और खोरसिंग तेरॉन शामिल हैं. इसके साथ ही बैठक में संस्था के बोर्ड सलाहकार प्रो. डॉ. सतीश अग्निहोत्री के दूरदर्शी दृष्टिकोण, रणनीतिक मार्गदर्शन और उनके बहुमूल्य योगदान के लिए विशेष आभार भी व्यक्त किया गया.
इस नई साझेदारी और HADCL के गठन का सबसे बड़ा उद्देश्य कारबी आंगलोंग क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदलना और उन्हें मजबूत बनाना है.अक्सर यह देखा जाता है कि किसान मेहनत बहुत करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता. इस संस्था का लक्ष्य है कि स्थानीय उपज को सीधे बड़े बाजारों से जोड़ा जाए. इसके तहत, उस इलाके में होने वाली सब्जियों, फलों और खास तौर पर अदरक-हल्दी जैसी मसाला फसलों की स्थानीय स्तर पर ही प्रोसेसिंग की जाएगी. प्रोसेसिंग के जरिए इनके वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जाएंगे और फिर उन्हें सीधे बड़े बाजारों में उतारा जाएगा. इस अहम कदम से बिचौलियों का असर खत्म होगा और किसानों को उनकी उपज का सीधा व बहुत अच्छा मुनाफा मिल सकेगा.कुल मिलाकर, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की आजीविका में सुधार करना और खेती को एक मुनाफे वाला व्यवसाय बनाना ही इसका असली मकसद है.
एर्डे एग्रो केनिदेशक संजीव मसालिया ने कहा आधुनिक कृषि-तकनीकऔर स्थानीय किसानों की समझ का एक बेहतरीन तालमेल बिठाकर। संस्था सबसे पहले किसानों को नई तकनीकों के बारे में जागरूक करेगी और उन्हें बताएगी कि कम लागत में अच्छी पैदावार कैसे की जा सकती है. खेतों से लेकर सीधे बाजार तक एक बहुत ही मजबूत सप्लाई चेन बनाई जाएगी. कारबी आंगलोंग की मिट्टी और वहां के मौसम के हिसाब से कौन सी फसलें सबसे ज्यादा फायदा देंगी, इस पर रिसर्च करके किसानों की मदद की जाएगी. पीपीपी मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसमें सरकारी तंत्र की मजबूत पहुंच और प्राइवेट सेक्टर की नई तकनीक का लाभ एक साथ मिलेगा. इस तरह HADCL जमीनी स्तर पर काम करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूती मिलेगी.
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