गांव-गांव महापंचायत का ऐलान (AI Image)संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 3 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक देशभर में ग्राम स्तरीय महापंचायतें आयोजित करने का ऐलान किया है. संगठन ने अपने सदस्य संगठनों से गांवों में महापंचायत आयोजित करने की अपील की है. इन बैठकों में किसान आंदोलन को आगे बढ़ाने और गांवों को संगठनात्मक गतिविधियों का केंद्र बनाने पर चर्चा होगी. एसकेएम के मुताबिक, 12 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल में राष्ट्रीय परिषद की आम सभा की बैठक होगी. इसमें किसान आंदोलन की अगली रणनीति और सात प्रमुख मांगों को लेकर आगे के कार्यक्रम तय किए जाएंगे. संगठन ने 26 नवंबर 2026 से किसान संघर्ष को तेज करने का भी आह्वान किया है.
SKM ने कहा कि ग्राम महापंचायतों की शुरुआत 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी 'शहीद दिवस' से होगी. एसकेएम ने 2021 की लखीमपुर खीरी घटना में मारे गए किसानों और पत्रकार रमन कश्यप को श्रद्धांजलि देने की बात कही. 3 अक्टूबर 2021 की घटना में चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हुई थी.
एसकेएम ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग भी उठाई है. संगठन ने विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन यानी एसआईआर को लेकर आरोप लगाया है कि इसके जरिए करीब 13 करोड़ मतदाताओं को अवैध रूप से हटाया गया और चुनाव प्रक्रिया में सत्तारूढ़ बीजेपी के हितों को फायदा पहुंचाया गया.
ग्राम महापंचायतों में केंद्र सरकार के सामने तीन प्रस्ताव रखने की बात कही गई है. इनमें 9 दिसंबर 2021 को सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन को लागू करना, सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 736 किसानों की स्मृति में शहीद स्मारक बनाना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग शामिल है.
एसकेएम ने सभी फसलों के लिए गारंटीकृत खरीद के साथ C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले पर एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग दोहराई है. संगठन ने भारत-अमेरिका समेत सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग भी रखी है.
संगठन ने ग्रामीण कर्जदारी खत्म करने के लिए व्यापक कर्जमाफी लागू करने की मांग की है. किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी की गई है. इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए 10,000 रुपये मासिक पेंशन की मांग रखी गई है.
एसकेएम ने विद्युत निजीकरण विधेयक 2025 वापस लेने, स्मार्ट मीटर और बीज विधेयक 2025 पर रोक लगाने की मांग की है. संगठन ने जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग का विरोध करते हुए किसानों, आदिवासियों और वनवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा की मांग की है.
एसकेएम ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, सभी श्रमिकों के लिए 42,000 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय करने और मनरेगा में 200 दिनों का काम देने की मांग की है. संगठन ने मनरेगा मजदूरी 700 रुपये प्रतिदिन करने की मांग भी रखी है. एसकेएम ने खान और खनिज अधिनियम 2026 तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम 2026 को निरस्त करने की मांग की है.
संगठन ने देशभर में धान खरीद के लिए व्यापक नीति बनाने, जीन-संपादित चावल के बीजों की बिक्री रोकने और हरियाणा में रात के समय कंबाइन मशीनों से धान कटाई पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की है. 12 अक्टूबर की करनाल बैठक में इन मुद्दों पर आगे की योजना पर फैसला होगा.
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