प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)बिहार में आधे दशक (करीब 7 साल) से अधिक समय के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) लागू होने जा रही है. रबी सीजन से राज्य में केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में बिहार सरकार जुट गई है. इसको लेकर सहकारिता विभाग की ओर से इस योजना के लिए किसानों से 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 के बीच आवेदन मांगे गए हैं. इसके साथ ही प्रखंड स्तर पर प्रस्तावित 114 पीवीसीएस इकाइयों को जल्द से जल्द पूरा करने की बात सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने कही.
उन्होंने कहा कि पीएमएफबीवाई योजना के जरिए प्राकृतिक आपदा या अन्य तय जोखिमों से फसल को हुए नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा सुरक्षा देने की व्यवस्था होगी. साथ ही उन्होंने अधिकारियों से सभी जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने को कहा. खास तौर पर नुकसान के बाद मिलने वाली क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध रखने पर जोर दिया.
बिहार में पीएमएफबीवाई योजना पहली बार लागू नहीं की जा रही है. योजना के शुरू होने के दौरान करीब 2 सालों तक राज्य में यह लागू थी. लेकिन, उसके बाद बंद कर दी गई थी. वहीं, 2026 के रबी सीजन से प्रदेश में फिर से लागू की जा रही है. वहीं, इस योजना के तहत किसानों को एक बार फिर आवेदन करने के लिए सहकारिता विभाग ने अपील की है.
आवेदन की प्रस्तावित सीमा 15 नवंबर से 15 जनवरी तक रखी गई है. यानी किसानों के पास बीमा कराने के लिए करीब दो महीने का समय होगा. सरकार की चुनौती अब योजना की घोषणा से ज्यादा इसे जमीन पर आसानी से लागू करने की है. क्योंकि, फसल खराब होने की स्थिति में नुकसान का आकलन, दावा और भुगतान की प्रक्रिया जितनी स्पष्ट और तेज होगी, किसानों के लिए योजना उतनी ही उपयोगी साबित होगी.
बिहार में योजना लागू करने की दिशा में राज्य सरकार पहले ही कदम उठा चुकी है. 21 जुलाई को राज्य स्तरीय फसल बीमा समन्वय समिति गठित की गई थी. इसके बाद 31 जुलाई को समिति की पहली बैठक हुई, जिसमें योजना के कई तकनीकी पहलुओं पर निर्णय लिए गए. इसमें किन फसलों को बीमा के दायरे में रखा जाएगा, बीमा की इकाई क्या होगी और अलग-अलग क्षेत्रों के लिए क्लस्टर कैसे बनाए जाएंगे, जैसे मुद्दे शामिल हैं. फसल कटनी प्रयोग में तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई है. बीमा कंपनियों के चयन के लिए निविदा प्रस्ताव भारत सरकार को वैलिडेशन के लिए भेजा जा चुका है.
किसान अभिजीत, जीएन शर्मा कहते हैं कि अगर यह योजना एक बार फिर से लागू की जा रही है, तो वह स्वागत योग्य है. लेकिन, पिछली बार जिस तरह की स्थिति थी, अगर वैसी रहेगी तो लागू करने का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा कि इस समय केंद्र सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन उसका लाभ कितना मिल रहा है, वह एक बड़ा सवाल है. राज्य में लागू करना है तो सरकार को इसमें पूर्ण रूप से पारदर्शिता लानी होगी और इस पूरी योजना में जो एजेंसियों का चयन हुआ है, उन पर सरकार को विशेष नजर रखनी होगी.
सहकारिता विभाग सब्जी क्षेत्र की योजनाओं के तहत 'हर थाली में बिहारी तरकारी' के तहत प्रखंड और पंचायत स्तर पर आधारभूत सुविधाओं को बेहतर करने में लगी है. वहीं, विभाग ने बताया कि प्रखंड स्तर पर प्रस्तावित 114 पीवीसीएस इकाइयों में 113 के लिए जमीन मिल चुकी है. इनमें 25 का निर्माण पूरा हो गया है, जबकि 82 इकाइयों पर काम चल रहा है. प्याज भंडारण की 68 स्वीकृत इकाइयों में 10 तैयार हो चुकी हैं और 50 निर्माणाधीन हैं.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today