‘राहत नहीं, सीधे पैसे दो’ (सांकेतिक फोटो)महाराष्ट्र के लातूर में सूखे और कम बारिश से परेशान किसानों ने सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया. किसानों ने हाथों में कद्दू और गाजर लेकर सरकार के राहत पैकेज पर सवाल उठाए. किसानों का कहना है कि लंबे समय से बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक सीधे आर्थिक मदद का ऐलान नहीं किया गया है. किसानों ने फसल नुकसान के बदले 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की तत्काल सहायता देने की मांग की.
लातूर कलेक्ट्रेट के बाहर हुए इस प्रदर्शन में कई किसान हाथों में कद्दू और गाजर लेकर पहुंचे. किसानों ने इन सब्जियों के जरिए सरकार के राहत उपायों को लेकर अपनी नाराजगी जताई. प्रदर्शन के दौरान सरकार के राहत संबंधी जीआर यानी सरकारी आदेश की प्रतीकात्मक रूप से प्रतिकृति भी जलाई गई. यह प्रदर्शन क्रांतिकारी शेतकरी संगठन की ओर से किया गया. संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कासबे के नेतृत्व में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा.
किसानों की सबसे बड़ी मांग फसल नुकसान के लिए तुरंत आर्थिक सहायता देने की है. संगठन ने सूखे से प्रभावित किसानों को 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने की मांग की है. किसानों का कहना है कि बारिश की कमी और लंबे समय तक चले सूखे की वजह से फसलों को नुकसान हुआ है. ऐसे में केवल कर्ज में राहत देने से किसानों की समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी. किसानों ने मांग की है कि फसल नुकसान का सर्वे जल्द पूरा किया जाए और सर्वे के बाद मिलने वाली आर्थिक मदद में देरी न की जाए.
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है. सरकार ने सूखे से प्रभावित किसानों के लिए कई राहत उपायों का ऐलान किया है. इनमें फसल ऋण का पुनर्गठन, जमीन के राजस्व में राहत, कृषि ऋण की वसूली को कुछ समय के लिए टालना और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत जैसे उपाय शामिल हैं. सरकार ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों को प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का आकलन करने के निर्देश भी दिए हैं.
सरकार की ओर से कहा गया है कि किसानों को फसल नुकसान के लिए कितनी आर्थिक सहायता दी जाएगी, इसका फैसला जमीन पर होने वाले नुकसान के आकलन के बाद किया जाएगा. उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी कहा था कि फसल नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद ही वास्तविक आर्थिक सहायता तय की जाएगी. हालांकि, प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि उन्हें अभी तत्काल आर्थिक मदद की जरूरत है. उनका आरोप है कि सरकार के जीआर में सीधे तौर पर किसानों को तुरंत पैसा देने की व्यवस्था नहीं की गई है.
क्रांतिकारी शेतकरी संगठन ने अपने ज्ञापन में कई मांगें रखी हैं. संगठन ने सूखा प्रभावित किसानों को 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने के अलावा नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए 2 लाख रुपये की विशेष सहायता देने की मांग की है. किसानों ने पात्र किसानों को नया फसल ऋण जल्द उपलब्ध कराने की भी मांग की है. इसके साथ ही कर्ज न चुका पाने की स्थिति में किसानों के CIBIL स्कोर को खराब होने से बचाने की मांग उठाई गई है.
सूखे के कारण केवल फसलों पर ही असर नहीं पड़ रहा है. किसानों ने पशुओं के लिए चारा और लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करने की मांग भी की है. संगठन ने मांग की है कि प्रभावित इलाकों में जरूरत के अनुसार चारा कैंप शुरू किए जाएं और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. किसानों ने यह भी कहा कि संकट की स्थिति खत्म होने तक बिजली बिल और कृषि ऋण की अनिवार्य वसूली पर रोक लगाई जाए.
संगठन ने कोल्हापुर जिले के हटकलंगले, शिरोल और शाहूवाड़ी तालुकों को भी सूखा राहत व्यवस्था में शामिल करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है. किसानों का कहना है कि जिन इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं, वहां किसानों को राहत देने के लिए सरकारी व्यवस्था को जल्द सक्रिय किया जाना चाहिए.
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति की पहचान करने के लिए Trigger-1 व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है. यह राज्य के सूखा प्रबंधन ढांचे का पहला चरण है. इसमें बारिश की कमी और लंबे समय तक बारिश न होने जैसे हालात को देखा जाता है. राज्य के नियमों के अनुसार, जब बारिश में 25 प्रतिशत से ज्यादा कमी हो और करीब 21 दिनों तक लगातार सूखा रहने की स्थिति बने, तो Trigger-1 सक्रिय किया जा सकता है. इसके बाद सूखे की स्थिति में राहत के लिए जरूरी कदम शुरू किए जाते हैं.
महाराष्ट्र सरकार ने सूखा घोषित किए गए 265 तालुकों में अधिकारियों को फसल नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं. इस सर्वे में यह देखा जाएगा कि सूखे और बारिश की कमी से किसानों की फसलों को कितना नुकसान हुआ है. इसी आकलन के आधार पर किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता तय की जाएगी. फिलहाल प्रदर्शन कर रहे किसान चाहते हैं कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो और उन्हें सीधे आर्थिक मदद मिले.
किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर समय रहते फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. प्रदर्शन के बाद किसान वहां से चले गए, लेकिन संगठन ने साफ कहा कि फसल नुकसान का मुआवजा और दूसरी मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है.
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