BRICS में बनेगा ग्रेन एक्सचेंज, अनाज की कीमत और सप्लाई पर होगा बड़ा असर

BRICS में बनेगा ग्रेन एक्सचेंज, अनाज की कीमत और सप्लाई पर होगा बड़ा असर

BRICS देशों ने अनाज की कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव और सप्लाई संकट से निपटने के लिए BRICS ग्रेन एक्सचेंज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. रूस के प्रस्ताव पर नई दिल्ली घोषणापत्र में इसका जिक्र किया गया है.

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BRICS में बनेगा ग्रेन एक्सचेंज, अनाज की कीमत और सप्लाई पर होगा बड़ा असरBRICS का अपना अनाज बाजार

BRICS देशों ने अनाज की कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव और खाद्य संकट से निपटने के लिए BRICS ग्रेन एक्सचेंज बनाने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई है. नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में रूस की इस पहल का जिक्र किया गया है. रूस चाहता है कि इस ग्रेन एक्सचेंज को इस साल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाए और 2027 तक इसे पूरी तरह चालू कर दिया जाए.

अनाज की कीमत और सप्लाई पर रहेगी नजर

BRICS देशों ने माना है कि दुनिया में अनाज के उत्पादन और कारोबार में सदस्य देशों की बड़ी भूमिका है, इसलिए अनाज की खरीद-बिक्री के लिए एक साझा प्लेटफॉर्म बनाने से खाद्य सुरक्षा मजबूत हो सकती है. इसका उद्देश्य अनाज की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी और सप्लाई में आने वाली रुकावट के असर को कम करना है. आगे चलकर इस प्लेटफॉर्म में दूसरे कृषि उत्पादों और कमोडिटीज को भी शामिल करने पर बातचीत हो सकती है.

रूस को सालाना 2.5 अरब डॉलर की बचत की उम्मीद

रूस लंबे समय से BRICS देशों के लिए अलग ग्रेन एक्सचेंज बनाने की वकालत कर रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक, रूस का मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के विकल्प के तौर पर BRICS का अपना एक्सचेंज बनाया जाए. रूस के मुताबिक, इससे BRICS देशों को अनाज के कारोबार में लागत कम करने में मदद मिल सकती है और हर साल करीब 2.5 अरब डॉलर तक की बचत संभव है.

खाद की सप्लाई पर भी BRICS देशों की नजर

BRICS घोषणापत्र में खाद की सप्लाई को लेकर भी चिंता जताई गई है. खाद की कमी और सप्लाई में रुकावट का सीधा असर खेती और खाद्य उत्पादन पर पड़ता है. चीन ने फिलहाल BRICS देशों को अपने फर्टिलाइजर निर्यात पर भविष्य में लगाए जाने वाले किसी भी प्रतिबंध से छूट देने पर सहमति नहीं दी है, इसलिए घोषणापत्र में इस मुद्दे पर आगे बातचीत जारी रखने की बात कही गई है. वहीं, BRICS देशों ने खेती में इस्तेमाल होने वाले जरूरी इनपुट जैसे खाद, बीज और दूसरे संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया है. इसके साथ ही सूखे और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर बीज प्रणालियों और राष्ट्रीय खाद्य भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई है.

जून में इंदौर में हुई BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक का भी घोषणापत्र में जिक्र किया गया. इसमें BRICS AGRIN नाम से एक किसान-केंद्रित नेटवर्क बनाने पर सहमति बनी है. इसमें कृषि इनपुट, जेनेटिक संसाधन और कृषि से जुड़ी जानकारी साझा करने पर सहयोग किया जाएगा.

एग्रो-इकोलॉजी और डिजिटल खेती पर भी जोर

BRICS देश जलवायु परिवर्तन के बीच खेती को ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनाने पर भी काम करेंगे. इसके लिए एग्रो-इकोलॉजी और रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का नेटवर्क बनाने की बात कही गई है. इसके अलावा डिजिटल एग्रीकल्चर पर भी BRICS नेटवर्क बनाया जाएगा. इसमें खेती के साथ एग्रोफॉरेस्ट्री, मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर जैसे क्षेत्र भी शामिल होंगे.

BRICS देशों ने कृषि व्यापार को आसान बनाने और बिना भेदभाव वाली सप्लाई चेन को बढ़ावा देने पर बातचीत जारी रखने की बात कही है. साथ ही WTO में कृषि से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग जारी रखने पर जोर दिया गया है. घोषणापत्र में माना गया है कि बदलती नीतियां, मौसम और वैश्विक घटनाक्रम कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और छोटे तथा पारिवारिक किसानों की आय पर सीधा असर डाल रहे हैं. ऐसे में BRICS देशों के बीच कृषि सहयोग बढ़ाने का मकसद किसानों को बेहतर बाजार, जरूरी इनपुट और खाद्य सुरक्षा से जोड़ना है. 

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