गुजरात में सूखे जैसे हालातगुजरात के कुछ इलाकों में कम बारिश और सूखे जैसे हालात को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में स्थिति साफ की है. सरकार ने कहा है कि किसी जिले में सिर्फ बारिश कम होने के आधार पर उसे सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जा सकता. सूखा घोषित करने से पहले बारिश के साथ-साथ फसल, मिट्टी में नमी, भूजल और वनस्पति की स्थिति समेत कई मानकों का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाएगा. प्रभारी राजस्व मंत्री ऋषिकेश पटेल ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी और विधायकों अमित चावड़ा और कीरित पटेल की ओर से उठाए गए मुद्दे का जवाब देते हुए यह जानकारी दी. विधायकों ने खास तौर पर जामनगर और देवभूमि द्वारका समेत राज्य के कुछ इलाकों में कम बारिश का मुद्दा उठाया था.
सरकार के मुताबिक, स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर यानी SEOC की 3 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में इस मॉनसून अब तक औसत बारिश का 94.83 प्रतिशत यानी करीब 584.43 मिलीमीटर बारिश हुई है. वहीं, दक्षिण गुजरात में स्थिति बेहतर रही है और यहां औसत बारिश का 103.61 प्रतिशत दर्ज किया गया है. हालांकि, सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के कुछ हिस्सों में बारिश काफी असमान रही है. देवभूमि द्वारका में औसत बारिश का सिर्फ 5.47 प्रतिशत, पोरबंदर में 18.12 प्रतिशत और जामनगर में 28.88 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई. कच्छ में औसत बारिश का 86.28 प्रतिशत पानी बरसा है. इन आंकड़ों से साफ है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं रही.
कम बारिश के बावजूद गुजरात में खेती का काम पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ है. सरकार के अनुसार, 3 सितंबर तक राज्य में सामान्य बुवाई क्षेत्र 24.30 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 20.36 लाख हेक्टेयर में बुवाई पूरी हो चुकी थी. यानी कुल सामान्य क्षेत्र के 83.84 प्रतिशत हिस्से में किसान फसल बो चुके हैं, जिसमें मूंगफली, कपास, सोयाबीन और गन्ने जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई सामान्य क्षेत्र के 100 प्रतिशत से भी ज्यादा हो चुकी है. वहीं, दलहनी फसलों की बुवाई सामान्य क्षेत्र के करीब 80.09 प्रतिशत हिस्से में हुई है.
राज्य सरकार का कहना है कि बारिश, पानी, बिजली और चारे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. सिंचाई और पीने के पानी की जरूरत पूरी करने के लिए नर्मदा कमांड एरिया से पानी की सप्लाई की जा रही है. वहीं, सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात में सौनी योजना और सुजलाम सुफलाम योजना के जरिए भी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिल सके, इसके लिए 21 जिलों में खेती की बिजली सप्लाई छह घंटे से बढ़ाकर आठ घंटे कर दी गई है. इनमें कच्छ, जामनगर, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, राजकोट, मेहसाणा, बोटाद और सुरेंद्रनगर जैसे जिले शामिल हैं. बिजली की मांग पूरी करने के लिए सितंबर और अक्टूबर में अतिरिक्त बिजली खरीदने की व्यवस्था भी की गई है.
कम बारिश का असर पशुपालन पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने जिला कलेक्टरों को जरूरतमंद पशुपालक परिवारों को हरा चारा बांटने की मंजूरी दी है. कच्छ, देवभूमि द्वारका, जामनगर, सुरेंद्रनगर और पोरबंदर के 542 गांवों में चारा बांटा जा रहा है. सरकार के मुताबिक, राज्य में इस समय करीब 502.45 लाख किलोग्राम चारा उपलब्ध है.
मंत्री ऋषिकेश पटेल ने बताया कि केंद्र के सूखा प्रबंधन मैनुअल-2016, जिसे 2020 में अपडेट किया गया था. उनके मुताबिक, केवल बारिश की कमी के आधार पर सूखा घोषित नहीं किया जा सकता. इसके लिए 'ट्रिगर-1' और 'ट्रिगर-2' के तहत कई मानकों को देखा जाता है. इनमें बारिश की स्थिति, फसल की बुवाई का क्षेत्र, पौधों की स्थिति, मिट्टी में नमी और भूजल स्तर जैसे मानक शामिल हैं. इसके अलावा फसल को कितना नुकसान हुआ है, इसका सैटेलाइट और GPS आधारित जमीनी जांच के जरिए आकलन किया जाएगा.
सरकार ने कहा कि इन सभी पहलुओं की जांच और तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावित जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने पर फैसला लिया जाएगा. फिलहाल सरकार का दावा है कि प्रभावित इलाकों में चारे, पीने और सिंचाई के पानी और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. (PTI)
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