बीकेयू नेता राकेश टिकैत. File Photoहरियाणा में सोनीपत के छोटू राम धर्मशाला में आयोजित किसान महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम, केंद्र सरकार की कथित दबाव की राजनीति, हरियाणा की सियासत और अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.
किसान नेता राकेश टिकैत ने पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में बेईमानी हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां फर्जी वोटिंग हुई और स्थानीय लोगों को मतदान से रोका गया. टिकैत ने कहा कि “बेईमानी करके सब कुछ किया गया है. चोरी भी ऐसी हो रही है, जिसे कोई पकड़ नहीं पाता.”
उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने डटकर संघर्ष किया और अगर कोई आखिरी दम तक लड़कर हारता है, तो वह हार नहीं बल्कि सम्मानजनक लड़ाई होती है. टिकैत ने इस मौके पर लोकतंत्र के भविष्य पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे हालात में लोकतंत्र कैसे बचेगा, यह बड़ा सवाल है.
आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के मामले पर टिकैत ने केंद्र सरकार पर दबाव की राजनीति का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पहले इन नेताओं पर छापेमारी कर दबाव बनाया गया और फिर उन्हें बीजेपी में शामिल कराया गया. टिकैत का दावा था कि अब बीजेपी में शामिल होने के बाद उनके यहां छापे नहीं पड़ेंगे.
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और हिसार पुलिस के बीच हुए मामले पर भी टिकैत ने सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि दुष्यंत चौटाला को नीचा दिखाने के लिए यह सब किया गया. टिकैत के अनुसार सरकार उनके परिवार को तोड़ने की कोशिश करेगी—कुछ लोगों को अपने साथ मिलाया जाएगा और कुछ को अलग कर परिवार में फूट डाली जाएगी.
राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल पर दिए गए बयान और उस पर कुलदीप बिश्नोई के पलटवार के सवाल पर टिकैत ने कहा कि राजनीति में इस तरह के बयान समय-समय पर आते रहते हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “इन लोगों के पास बहुत मसाला है, जो धीरे-धीरे सामने आता रहता है.”
अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील पर टिप्पणी करते हुए राकेश टिकैत ने इसे ट्रेड डील नहीं बल्कि अमेरिका का दबाव बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि इस समझौते का किसानों और मजदूरों पर नकारात्मक असर पड़ेगा. टिकैत ने कहा कि फल, सब्जी और अनाज उगाने वाले किसान बर्बाद हो सकते हैं, क्योंकि ऐसी नीतियां सीधे तौर पर खेती-किसानी के हितों के खिलाफ हैं.
किसान महापंचायत में राकेश टिकैत ने अपने भाषण के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने चुनावी पारदर्शिता, लोकतंत्र की रक्षा और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखने की मांग दोहराई. मंच से दिए गए उनके बयानों ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today