तीसरी फसल के सवाल पर अटकी किसान हेल्पलाइन, CM मोहन यादव की कॉल से खुली पोल

तीसरी फसल के सवाल पर अटकी किसान हेल्पलाइन, CM मोहन यादव की कॉल से खुली पोल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किसान हेल्पलाइन पर किए गए फोन कॉल के बाद एक नया विवाद सामने आ गया है. कॉल सेंटर द्वारा गर्मियों की तीसरी फसल से जुड़ी जानकारी न मिल पाने पर कांग्रेस ने सरकार की किसान योजनाओं और हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं. वहीं मुख्यमंत्री ने PACS सदस्यता अभियान, बेहतर MSP, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक खेती और बोनस योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के सरकार के प्रयासों के बारे में बताया.

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तीसरी फसल के सवाल पर अटकी किसान हेल्पलाइन, CM मोहन यादव की कॉल से खुली पोलमध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम मोहन यादव

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को कृषि विभाग के एक वर्कशॉप में 'किसान हेल्पलाइन' और 'प्राथमिक कृषि ऋण समिति' (PACS) की सदस्यता बढ़ाने के लिए एक अभियान शुरू किया. जब सीएम यादव ने इसके उद्घाटन के दौरान CM हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया, तो उन्हें एक दिलचस्प जवाब मिला. जब यादव ने कॉल सेंटर से तीसरी फसल के बारे में जानना चाहा, जो गर्मियों में उगाई जा सकती है, तो कॉल सेंटर ने उनका नाम पूछा.

जब सीएम यादव ने बताया कि वह एक किसान हैं, तो कॉल सेंटर ने जवाब दिया कि उनका मोबाइल नंबर रजिस्टर कर लिया गया है, और उनका अधिकारी उनसे संपर्क करेगा. 

कांग्रेस का हमला

इस घटना के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. इस मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) अध्यक्ष जीतू पटवारी का बयान आया. पटवारी ने कहा, CM किसान हेल्पलाइन की असलियत तब सामने आ गई, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद हेल्पलाइन पर कॉल किया.

पटवारी ने कहा कि यादव का कॉल उठाने वाले व्यक्ति को यह भी नहीं पता था कि किसानों को गर्मियों में कौन सी फसल उगानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि यह हेल्पलाइन कोई जानकारी नहीं दे सकती.

पटवारी ने एक पोस्ट में लिखा, जिस तरह मुख्यमंत्री जी को यह नहीं पता कि गुड़ खेत में नहीं उगता, एक बीघा में 50 क्विंटल गेहूं नहीं होता, ठीक उसी तरह उनके अधिकारियों को भी यह नहीं पता कि गर्मी में कौन सी फसल उगाई जानी चाहिए. जिस CM किसान हेल्पलाइन की वाहवाही मोहन यादव जी हर मंच से लूटते थे, आज उन्होंने रील बनवाने के लिए उसी CM किसान हेल्पलाइन पर फोन लगाया और किसान बनकर सवाल किया.

जवाब आया: “हमें इसकी जानकारी नहीं है!” यह है विज्ञापन के ‘किसान पुत्र’ मोहन यादव और उनकी सरकार!

16 विभाग एक साथ

इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने 'कृषि वर्ष' में कृषि से जुड़े सभी 16 विभागों को एक ही मंच पर लाने की योजना बनाई है, जो शुरू में मुश्किल लग रही थी. उन्होंने कहा कि हर विभाग किसानों से जुड़ा है, और सरकार ने अपने सीमित संसाधनों के भीतर सभी विभागों को एक साथ लाने के प्रयास किए हैं.

कृषि के बारे में आम धारणा के संबंध में, मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी बच्चे से पूछा जाए कि वह अपनी जिंदगी में क्या करना चाहता है, तो वह कभी यह नहीं कहेगा कि वह किसान बनना चाहता है. यादव के अनुसार, यहां तक कि वे बच्चे भी, जिनके परिवार कृषि से जुड़े हैं, किसान नहीं बनना चाहते, लेकिन सभी को इस धारणा को बदलने के लिए काम करना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को आधुनिक खेती और नई तकनीकों को अपनाना चाहिए. उन्होंने बताया कि अब किसान:

  • खेती से निकलने वाले कचरे (जैसे पुआल आदि) को प्रोसेस करके अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं
  • गेहूं, धान और मक्का के बचे हुए अवशेषों से पशुओं के लिए चारा बना रहे हैं
  • सरकार की ओर से तय किए गए बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का फायदा उठा रहे हैं
  • फिलहाल राज्य सरकार गेहूं की खरीद 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है, जिससे किसानों को ज्यादा लाभ मिल रहा है

सिंचाई और फसल के नए मौके

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि सिंचाई व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है. जैसे:

  • नहरों का जाल बढ़ा है और बिजली की सुविधा बेहतर हुई है
  • किसान अब एक साल में कई फसलें उगा पा रहे हैं, यहां तक कि तीसरी ग्रीष्मकालीन फसल भी
  • सभी इलाकों में खेती की पैदावार बढ़ी है

उन्होंने यह भी घोषणा की कि उड़द की खरीद पर किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय और बढ़ेगी.

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