
चलो मुंबई मार्च के दौरान हुआ हंगामाकोंकण के आम और काजू किसानों की मांगों को लेकर शुक्रवार को मुंबई में बड़ा राजनीतिक और किसान आंदोलन देखने को मिला. विपक्षी दलों और किसान संगठनों द्वारा आयोजित "चलो मुंबई" मार्च गिरगांव चौपाटी से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास 'वर्षा' तक निकाला जाना था, लेकिन आंदोलन शुरू होने से पहले ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई. मंत्रालय के पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और सुबह से ही किसान नेताओं को रोकने के नोटिस जारी कर दिए गए थे. इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, किसान नेता राजू शेट्टी, विनायक राउत और महादेव जानकर समेत कई नेता शिवसेना ठाकरे गुट के कार्यालय में जुटे.
प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही कुछ कार्यकर्ता बाहर से अंदर पहुंचने लगे, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया. इसी बात को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस शुरू हुई जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की, जिसके विरोध में कई नेता सड़क पर ही लेट गए. इस दौरान मंत्रालय से मरीन ड्राइव जाने वाला रास्ता कुछ समय के लिए बाधित हो गया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नाराजगी जताते हुए पुलिस पर आम फेंके. माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और बाद में कई नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया.

किसानों का आरोप है कि इस साल बेमौसम बारिश और खराब मौसम ने कोंकण क्षेत्र में आम और काजू की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. किसानों के मुताबिक, लगभग 90 प्रतिशत फसल प्रभावित हुई है, जिससे उनकी आय बुरी तरह घट गई. सरकार ने राहत के तौर पर आम उत्पादकों के लिए प्रति हेक्टेयर 22 हजार रुपये सहायता की घोषणा की थी, लेकिन छोटे भूधारकों को बहुत कम मुआवजा मिला. इसी नाराजगी को लेकर किसान मुंबई पहुंचे थे. किसानों की मांग है कि आम के बागानों के लिए 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर और काजू बागानों के लिए 3 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाए.
आंकड़ों के अनुसार, कोंकण के करीब 1.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचा है. पिछले साल जहां हापुस आम का उत्पादन 2.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहा था, वहीं इस साल यह घटकर करीब 50 से 60 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है.
इसका असर मुंबई एपीएमसी बाजार में भी दिखाई दिया. पिछले साल 17 मार्च तक जहां 39 हजार से ज्यादा पेटियां बाजार पहुंची थीं, वहीं इस बार यह संख्या करीब 5,700 पेटियों तक सीमित रह गई. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हुई है.
पुलिस ने आंदोलनकारी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बाद देर शाम रिहा कर दिया. वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया. विपक्ष का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है. (इनपुट- रित्विक/अभिजीत)
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