प्याज के दामों से नाराज किसान: मंडी के बाहर ट्रैक्टर‑भर उपज फेंकी, APMC भंग करने की मांग

प्याज के दामों से नाराज किसान: मंडी के बाहर ट्रैक्टर‑भर उपज फेंकी, APMC भंग करने की मांग

महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के विरोध में किसानों ने नंदगांव APMC के बाहर ट्रैक्टर‑भर प्याज फेंक दिया. किसानों ने APMC को भंग करने, 2,000 रुपये प्रति क्विंटल MSP तय करने और नुकसान के मुआवजे की मांग की है.

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प्याज के दामों से नाराज किसान: मंडी के बाहर ट्रैक्टर‑भर उपज फेंकी, APMC भंग करने की मांगप्याज खरीद में बड़ी घपलेबाजी

महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट ने किसानों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया है. सोमवार को नासिक जिले के नंदगांव कृषि उपज मंडी समिति (APMC) के बाहर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. आक्रोशित किसानों ने विरोध करते हुए एक पूरी ट्रैक्टर‑ट्रॉली भर प्याज मंडी के गेट के सामने फेंक दी और प्रशासन-व्यापारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

किसानों का कहना है कि मौजूदा दामों पर प्याज बेचना तो दूर, खेत से मंडी तक लाने का खर्च भी नहीं निकल पा रहा. हालात ऐसे हैं कि कई किसानों को अपनी मेहनत की फसल या तो औने‑पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है या फिर मजबूरी में फेंकनी पड़ रही है.

लागत भी नहीं निकल रही

प्रदर्शन कर रहे किसानों के मुताबिक, नासिक जिले की कई मंडियों में औसत क्वालिटी वाला प्याज 800 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रहा है, जबकि छोटी और कमजोर क्वालिटी के प्याज के दाम 1 से 4 रुपये प्रति किलो तक गिर चुके हैं. किसानों का कहना है कि बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और ढुलाई का खर्च जोड़ें, तो इन दरों पर खेती पूरी तरह घाटे का सौदा बन चुकी है.

एक किसान ने गुस्से में कहा, “हम महीनों खेत में पसीना बहाते हैं, कर्ज लेकर फसल उगाते हैं और मंडी में आकर पता चलता है कि हमारी उपज की कोई कीमत ही नहीं बची. यह नाइंसाफी है.”

APMC को भंग करने की मांग

किसानों ने नंदगांव APMC को तत्काल भंग करने की मांग उठाई है. आरोप है कि बाजार समिति न तो सही तरीके से नीलामी करा पा रही है और न ही किसानों के हितों की रक्षा कर रही है. किसानों का कहना है कि मंडी प्रशासन पूरी तरह फेल हो चुका है और व्यापारियों के आगे बेबस नजर आता है.

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने भी APMC पर तीखा हमला बोला है. संघ ने कहा कि समिति सिर्फ कागजों पर चल रही है, जमीन पर कोई जवाबदेही नहीं है. न तो निगरानी है, न ही किसानों की शिकायतें सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद है.

क्यों गिरे दाम?

प्याज उत्पादक संघ के अनुसार, दाम गिरने की कई वजहें हैं, जैसे रबी सीजन में प्याज की बंपर पैदावार, बढ़ती गर्मी से प्याज का जल्दी सड़ना, नुकसान से बचने के लिए किसानों की मजबूरी में बिक्री और कमजोर और लचर निर्यात नीतियां.

इन सब कारणों ने मिलकर बाजार में सप्लाई बढ़ा दी, जबकि मांग उतनी नहीं बढ़ पाई, जिसका खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है.

MSP और मुआवजे की मांग

किसान संगठनों ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि प्याज के लिए कम से कम 2,000 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया जाए. साथ ही, जिन किसानों को भारी नुकसान हुआ है, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए. संघ का कहना है कि अगर सरकार ने अब भी ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले सीजन में किसान प्याज लगाना छोड़ देंगे, जिससे भविष्य में और बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

पुलिस तैनात, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के बाद नंदगांव APMC के अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की, लेकिन नाराज किसान ठोस आश्वासन से कम पर मानने को तैयार नहीं दिखे. किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए मंडी परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया. किसान संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और उग्र होगा.

एक नेता ने दो टूक कहा, “अब यह लड़ाई आर‑पार की है. या तो हमें हमारी फसल का सही दाम मिलेगा, या फिर ये मंडियां हमारी आवाज हर दिन ऐसे ही सुनेंगी.”

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