कर्नाटक CM डीके शिवकुमार (Photo-ITG)कर्नाटक में बारिश की कमी और सूखे की आशंका के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सूखे जैसे हालातों को लेकर केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है. इस बीच, प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से किसानों के लिए 50,000 रुपये प्रति एकड़ राहत देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार सिर्फ केंद्र को पत्र लिखने तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी बताए कि अब तक राज्य स्तर पर किसानों की मदद के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में बन रहे सूखे के हालात का आकलन करने के लिए केंद्र की टीम भेजने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि 11 जुलाई तक कर्नाटक में सामान्य 292 मिमी के मुकाबले केवल 203 मिमी बारिश हुई है यानी करीब 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. राज्य के 31 में से 18 जिलों और 240 में से 141 तालुकों में सामान्य से कम बारिश हुई है.
इसके कारण खरीफ बुवाई लक्ष्य का केवल 34 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है, जबकि बड़े जलाशयों में भी जल भंडारण क्षमता का सिर्फ 34 प्रतिशत पानी बचा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने फसल सलाह, जिला स्तर की आकस्मिक योजनाएं और सूखा राहत उपाय शुरू कर दिए हैं, लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र की तुरंत मदद जरूरी है, लेकिन केंद्र की समय पर मदद से स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सकेगा.
इधर, बीजेपी नेता विजयेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले सूखे की स्थिति का अध्ययन करने के लिए मंत्रियों को जिलों में भेजने की बात कही थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कृषि मंत्री तक नहीं है और कई मंत्री अपने विभागों की जिम्मेदारियों के बजाय अन्य गतिविधियों में व्यस्त हैं. सूखे की समीक्षा के लिए जिलों का दौरा और विकास कार्यक्रमों की बैठकें भी समय पर नहीं हो रही हैं.
BJP प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य की स्थिति को लेकर गंभीर है और केंद्रीय टीम के आने तक किसानों को इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए. उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि तुरंत अंतरिम राहत की घोषणा की जाए, मंत्रियों को प्रभावित इलाकों में भेजा जाए और किसानों को 50,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सूखा मुआवजा दिया जाए. (पीटीआई)
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