बरनाला में बड़ा प्रदर्शनपंजाब के बरनाला में बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर मंगलवार को बड़ा प्रदर्शन किया गया. कौमी इंसाफ मोर्चा के आह्वान पर विभिन्न सिख, किसान और मजदूर संगठनों के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए और पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की कोठी के बाहर रोष प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि जिन बंदी सिंहों की सजा पूरी हो चुकी है, उन्हें बिना किसी देरी के रिहा किया जाए. इस दौरान प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी फिल्म पर रोक, भारत-अमेरिका समझौते और वर्ष 2027 के चुनावों को लेकर भी अपनी राय रखी.
इस प्रदर्शन में पंजाब और हरियाणा के कई किसान संगठनों, सिख जत्थेबंदियों और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. कौमी इंसाफ मोर्चा की तालमेल कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दर्शन पाल, भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के प्रदेश महासचिव काका सिंह कोटड़ा, भारतीय किसान यूनियन हरदो झंडे के प्रदेश अध्यक्ष सुखजीत सिंह और हरियाणा से भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे. सभी ने एकजुट होकर बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को जोर-शोर से उठाया.
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने आरोप लगाया कि कई बंदी सिंह अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक जेल से रिहा नहीं किया गया है. उनका कहना था कि हर चुनाव के समय विभिन्न सरकारें बंदी सिंहों की रिहाई का वादा करती हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद इन वादों को पूरा नहीं किया जाता. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल कानूनी नहीं, बल्कि इंसाफ का भी मुद्दा है और सरकार को इस पर जल्द फैसला लेना चाहिए.
प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने साफ कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा. उनका कहना था कि यह मुद्दा आने वाले समय में और जोर पकड़ सकता है. नेताओं ने यह भी कहा कि यदि बंदी सिंहों की रिहाई नहीं होती है तो इसका असर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है.
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं मिलने पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना था कि लोगों को इस फिल्म को देखने का अधिकार मिलना चाहिए. नेताओं ने कहा कि कई जगहों पर लोग इस फिल्म को अपने स्तर पर गांवों और शहरों में दिखा रहे हैं.
किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका के प्रस्तावित समझौते पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि यदि यह समझौता लागू होता है तो इसका असर किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम लोगों पर पड़ सकता है. उन्होंने सरकार से ऐसे किसी भी फैसले से पहले किसानों और अन्य वर्गों की राय लेने की मांग की.
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने घोषणा की कि 25 जुलाई को किसान भवन में करीब 100 इंसाफपसंद संगठनों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी. इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और आंदोलन को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे का विरोध करने का भी ऐलान किया.
प्रदर्शन को देखते हुए बरनाला पुलिस ने पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की कोठी के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. हालांकि प्रदर्शन के समय केवल सिंह ढिल्लों अपने घर पर मौजूद नहीं थे. पुलिस की मौजूदगी में पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और किसी तरह की अप्रिय घटना सामने नहीं आई.
बरनाला में हुए इस प्रदर्शन के जरिए विभिन्न किसान, सिख और मजदूर संगठनों ने केंद्र सरकार पर बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. अब सभी की नजर 25 जुलाई को होने वाली बैठक और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है. (आशीष शर्मा का इनपुट)
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