MSP, एथेनॉल और बीज नीति पर किसानों की मांग, कृषि व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत

MSP, एथेनॉल और बीज नीति पर किसानों की मांग, कृषि व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत

किसानों ने कृषि नीति में सुधार की मांग को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपा. किसानों ने MSP, एथेनॉल नीति, आधुनिक बीज, बेहतर बाजार व्यवस्था और नई तकनीक से जुड़ी समस्याओं पर सुझाव दिए. उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आसान बनाने के लिए नई राष्ट्रीय कृषि नीति बनाने की मांग की.

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MSP, एथेनॉल और बीज नीति पर किसानों की मांग, कृषि व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरतMSP, इथेनॉल और बीज नीति पर किसानों की मांग

अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति ने देश की कृषि व्यवस्था में सुधार को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक ज्ञापन सौंपा है. 4 अगस्त 2026 को हुई बैठक के बाद दिए गए इस ज्ञापन में किसानों की आमदनी बढ़ाने, खेती को आसान बनाने, फसलों के बेहतर दाम दिलाने और आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंचाने की मांग की गई है.

किसान संगठनों का कहना है कि खेती की नीति का मकसद सिर्फ ज्यादा फसल पैदा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि किसान की कमाई बढ़ाना भी होना चाहिए. किसानों को ऐसी व्यवस्था मिलनी चाहिए जिसमें उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए अच्छे विकल्प, सही कीमत और नई तकनीक का फायदा मिल सके.

एथेनॉल नीति का फायदा किसानों को मिलने की मांग

किसान संगठनों ने एथेनॉल नीति को लेकर कहा कि यह देश के लिए अच्छी पहल है, क्योंकि इससे पेट्रोल में एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ रहा है और किसानों की फसलों की मांग भी बढ़ सकती है. लेकिन इस योजना का असली फायदा किसानों तक पहुंचना जरूरी है.

ज्ञापन में कहा गया है कि E20 पेट्रोल को लेकर लोगों को सही और पूरी जानकारी दी जानी चाहिए. पेट्रोल पंपों पर यह साफ लिखा होना चाहिए कि पेट्रोल में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिला हुआ है. साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि अलग-अलग वाहनों पर इसका क्या असर पड़ता है.

किसान संगठनों ने यह भी कहा कि एथेनॉल बनाने के लिए ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिनमें कम पानी की जरूरत होती है. पानी की कमी वाले इलाकों में धान की जगह मक्का, ज्वार और दूसरी कम पानी वाली फसलों से एथेनॉल बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए.

FCI के चावल से मक्का किसानों को नुकसान की चिंता

किसान संगठनों ने एथेनॉल बनाने के लिए FCI के चावल के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है. उनका कहना है कि अगर बहुत कम कीमत पर बड़ी मात्रा में सरकारी चावल एथेनॉल कंपनियों को दिया जाता है तो इससे मक्का जैसी दूसरी फसलों की मांग कम हो सकती है.

उन्होंने मांग की है कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे मक्का किसानों को नुकसान न हो. मक्का की MSP पर खरीद या किसानों को कीमत की सुरक्षा देने के लिए कदम उठाए जाएं. साथ ही एथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली फसलों की कीमत तय करने की नीति लंबे समय के लिए बनाई जाए, ताकि किसानों को बार-बार बदलाव का सामना न करना पड़े.

MSP के साथ किसानों को बेहतर बाजार भी मिले

ज्ञापन में कहा गया है कि MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों के लिए जरूरी है, लेकिन सिर्फ सरकारी खरीद से सभी किसानों को फायदा नहीं मिल सकता. किसानों को ऐसा बाजार चाहिए जहां उन्हें अपनी फसल बेचने के ज्यादा विकल्प मिलें.

किसान संगठनों ने e-NAM बाजार को मजबूत करने की मांग की है. उनका कहना है कि किसान देश के किसी भी हिस्से में अपनी फसल अच्छे दाम पर बेच सकें, इसके लिए बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए.

इसके लिए फसल की सही गुणवत्ता जांच, आसान परिवहन व्यवस्था और व्यापारियों की बेहतर व्यवस्था बनाने की जरूरत है. किसान संगठनों ने यह भी कहा कि किसानों को बाजार की कीमतों की जानकारी पहले से मिलनी चाहिए, ताकि वे सही समय पर सही फैसला ले सकें.

किसानों को अच्छे बीज और नई तकनीक देने की मांग

किसान संगठनों ने कहा कि आज के समय में किसानों को नई तकनीक और बेहतर बीजों की जरूरत है. जैसे पहले हरित क्रांति के समय अच्छे बीज और नई तकनीक से खेती में बड़ा बदलाव आया था, उसी तरह आज भी किसानों को आधुनिक सुविधाएं मिलनी चाहिए.

ज्ञापन में मांग की गई है कि नई किस्मों के बीजों को मंजूरी देने की प्रक्रिया आसान और तेज होनी चाहिए. किसानों को ऐसे बीज मिलने चाहिए जो कम पानी में ज्यादा उत्पादन दे सकें और बदलते मौसम का सामना कर सकें.

संगठनों ने कहा कि किसान अपने खेत के बीज को बचाने, दोबारा लगाने और जरूरत पड़ने पर दूसरे किसानों के साथ साझा करने के अधिकार से वंचित नहीं होने चाहिए. वहीं खराब बीज बेचने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए विशेष योजना की मांग

किसान संगठनों ने पंजाब और हरियाणा के किसानों की समस्याओं को भी उठाया है. उन्होंने कहा कि इन दोनों राज्यों के किसानों ने देश को गेहूं और चावल उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन लगातार एक ही फसल उगाने से अब कई समस्याएं बढ़ गई हैं.

इन राज्यों में भूजल का स्तर कम हो रहा है, मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और किसानों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ रहा है.

किसान संगठनों ने मांग की है कि पंजाब और हरियाणा के लिए विशेष कृषि बदलाव योजना बनाई जाए. इसके तहत किसानों को मक्का, दाल, तिलहन और दूसरी फसलों की खेती के लिए मदद दी जाए. साथ ही खेती के साथ पशुपालन, बागवानी और पानी बचाने वाली तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए.

कृषि नीतियों में स्थिरता लाने की मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी अचानक बदलने वाली नीतियों से होती है. कई बार सरकार आयात-निर्यात के नियम अचानक बदल देती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.

किसान संगठनों ने मांग की है कि खेती से जुड़ी नीतियां पहले से तय और स्थिर होनी चाहिए, ताकि किसान फसल लगाने से पहले सही योजना बना सकें.

उन्होंने आवश्यक वस्तु अधिनियम में भी सुधार की मांग की है. संगठनों का कहना है कि भंडारण और व्यापार पर रोक तभी लगनी चाहिए जब वास्तव में कोई बड़ी समस्या हो. बार-बार प्रतिबंध लगाने से किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान होता है.

छह महीने में राष्ट्रीय कृषि नीति बनाने का सुझाव

किसान संगठनों ने सरकार से छह महीने के अंदर एक राष्ट्रीय कृषि नीति बनाने के लिए आयोग गठित करने की मांग की है. इस आयोग में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, किसान संगठनों, कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है. किसान संगठनों का कहना है कि देश के किसानों को ऐसी कृषि व्यवस्था चाहिए जिसमें उन्हें फसल का सही दाम, नई तकनीक, बेहतर बाजार और सरकार की स्थिर नीतियों का भरोसा मिले. उन्होंने कृषि मंत्री से अपील की है कि किसानों की इन मांगों पर ध्यान देते हुए जल्द जरूरी कदम उठाए जाएं.

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