कर्नाटक में सूखे का बड़ा संकट!कर्नाटक में इस साल सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि राज्य में जमीन के अंदर पानी यानी भूजल का स्तर तेजी से नीचे गया है. इसका असर खेती पर भी पड़ा है. कई जगह किसानों की फसलें खराब हो गई हैं और कुछ इलाकों में किसान फसल की बुवाई तक नहीं कर पाए. सरकार ने अब तक 100 तालुकों में सूखा घोषित कर दिया है. बाकी इलाकों में भी स्थिति की जांच की जा रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर बारिश और पानी की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में पीने के पानी की कमी हो सकती है. खेती और लोगों की जरूरत के लिए पानी की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में सरकार के सामने पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन सकता है. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सूखे की स्थिति गंभीर है और सरकारी नियम पूरे होते हैं, वहां जल्द सूखा घोषित किया जाएगा. इस मामले में सरकार किसी पार्टी या राजनीति को नहीं देखेगी.
सूखे का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है. पानी की कमी के कारण कई किसानों की फसलें खराब हो गई हैं. वहीं, कुछ जगह खेती भी नहीं हो पाई है. इससे किसानों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की इन समस्याओं पर विधानसभा में खास चर्चा होगी. कर्नाटक विधानसभा का विशेष सत्र 21 से 23 सितंबर तक चलेगा. इसमें दो दिन सूखे और किसानों की परेशानियों पर चर्चा के लिए रखे गए हैं. इस दौरान अलग-अलग इलाकों के विधायक अपने क्षेत्र के किसानों की समस्याएं सदन में उठा सकेंगे.
कर्नाटक में बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले सप्ताह राज्य में बिजली की मांग 19,000 मेगावाट से ज्यादा हो गई थी. शाम के समय बिजली की जरूरत सबसे ज्यादा बढ़ जाती है. इस दौरान सरकार को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी. सरकार ने करीब 11 से 13 रुपये प्रति यूनिट की कीमत पर बिजली खरीदी. बढ़ती मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज से इस मामले पर बात करने को कहा है. सरकार पड़ोसी राज्यों से भी अतिरिक्त बिजली लेने की कोशिश करेगी.
बिजली की कमी को दूर करने के लिए कर्नाटक सरकार थर्मल पावर यानी कोयले से बनने वाली बिजली का उत्पादन बढ़ाने पर विचार कर रही है. सरकार उन राज्यों से भी बिजली लेने की कोशिश कर सकती है जहां कोयला ज्यादा मिलता है. इससे कर्नाटक में बिजली की जरूरत को पूरा करने में मदद मिल सकती है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक जरूरत पड़ने पर देश के दूसरे हिस्सों से भी बिजली ले सकता है. इसके लिए 'वन नेशन, वन ग्रिड' व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस व्यवस्था में देश के अलग-अलग राज्यों के बिजली ग्रिड आपस में जुड़े हुए हैं. जरूरत पड़ने पर एक राज्य में बनी बिजली दूसरे राज्य तक पहुंचाई जा सकती है. हालांकि, इसके लिए बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च देना होगा.
कर्नाटक सरकार की कैबिनेट बैठक 18 सितंबर को दक्षिण कन्नड़ जिले में होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बैठक में तटीय इलाके के विकास पर ध्यान दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य लोगों को रोजगार के बेहतर मौके देना और दूसरे इलाकों में होने वाले पलायन को कम करना है. बैठक में कई नई योजनाओं और कार्यक्रमों की घोषणा भी की जा सकती है.
मुख्यमंत्री ने अपने गृह क्षेत्र कनकपुरा में एक छात्रावास का दौरा भी किया. उन्होंने वहां अधिकारियों से बच्चों की पढ़ाई और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी ली. उन्होंने कहा कि कलबुर्गी, रायचूर, हावेरी और बीदर के कई बच्चे कनकपुरा के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते हैं. त्योहार के कारण कई बच्चे अपने घर गए हुए थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि बच्चों की पढ़ाई सही तरीके से हो और हॉस्टल में उनकी अच्छी देखभाल हो. उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को सरकार के भरोसे छोड़ते हैं, इसलिए सरकार को भी उनकी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभानी चाहिए.
मुख्यमंत्री ने बताया कि कांग्रेस के सभी विधायक 'प्रजा सेवा' कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. इस कार्यक्रम का मकसद लोगों की समस्याएं सुनना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर दिलाना है. कुछ विधायकों को अभी इस कार्यक्रम और संबंधित विभाग के बारे में जानकारी दी जानी है.
कर्नाटक सरकार में खाली मंत्री पदों को भरने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बारे में फैसला कांग्रेस पार्टी के निर्देश के बाद लिया जाएगा. फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सूखे से निपटना, किसानों की मदद करना और राज्य में पीने के पानी और बिजली की कमी को रोकना है.
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