सड़कों पर उतरे सोनीपत के किसानहरियाणा के सोनीपत में अपनी लंबित मांगों को लेकर किसान एक बार फिर सड़कों पर उतर आए. सैकड़ों की संख्या में किसान छोटूराम धर्मशाला में एकत्रित हुए और वहां से मार्च निकालते हुए सोनीपत लघु सचिवालय पहुंचे. किसानों ने सचिवालय के सामने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. इसके बाद किसानों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम मांगों का ज्ञापन डीसी को सौंपा गया. किसानों ने सरकार से जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की.
किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा हाईटेंशन बिजली की लाइनों के लिए मिलने वाले मुआवजे का है. किसानों ने बताया कि इस मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ उनकी बैठक पहले ही हो चुकी है. बैठक में किसानों की करीब 10 मांगों पर चर्चा हुई थी. किसानों के मुताबिक, हाईटेंशन तारों के लिए उचित मुआवजा देने का आश्वासन भी दिया गया था. प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि इस मामले में ऊपर से आदेश जारी किए जा चुके हैं. अब किसान यह जानना चाहते हैं कि उन आदेशों पर अधिकारियों की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है. किसानों ने मांग की कि उन्हें साफ जानकारी दी जाए कि मुआवजा देने की प्रक्रिया कब शुरू होगी और किसानों को उनका हक कब तक मिलेगा.
किसानों ने धान की खरीद का मुद्दा भी उठाया. किसानों की मांग है कि पीआर धान की खरीद सरकार की ओर से सही तरीके से और जल्द शुरू की जाए. किसानों का कहना है कि पीआर धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर होनी चाहिए, ताकि उन्हें अपनी फसल बेचने में परेशानी न हो. किसानों ने आरोप लगाया कि धान खरीद से जुड़े कुछ सेलर किसानों को परेशान करते हैं. किसानों के मुताबिक, उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. किसानों ने सरकार से मांग की कि धान खरीद की व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसान बिना परेशानी के अपनी फसल बेच सकें और उन्हें एमएसपी का लाभ मिल सके.
सोनीपत में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक क्षेत्र को देखते हुए किसानों ने जमीन के कलेक्टर रेट बढ़ाने की मांग भी रखी. किसानों का कहना है कि जिले में लगातार औद्योगिक और विकास से जुड़े काम बढ़ रहे हैं. ऐसे में जमीन की कीमतों में भी बदलाव हुआ है. किसानों ने कहा कि मौजूदा कलेक्टर रेट और जमीन की बाजार कीमत में अंतर होने से जमीन मालिकों को उचित मुआवजा मिलने में परेशानी हो सकती है. इसलिए सरकार को क्षेत्र के विकास और जमीन की मौजूदा कीमत को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी करनी चाहिए.
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने दूध और उससे बनने वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा भी उठाया. किसानों ने सरकार से मांग की कि दूध, पनीर, खोया और दूध से बने दूसरे खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. किसानों का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थ लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. इसलिए सरकार और संबंधित विभागों को नियमित जांच करनी चाहिए और अगर कहीं मिलावट मिलती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.
प्रदर्शन के अंत में किसानों ने अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम डीसी को सौंपा. किसानों ने कहा कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और उन्हें अब जल्द समाधान की उम्मीद है. किसानों ने सरकार से हाईटेंशन लाइन के मुआवजे, पीआर धान की एमएसपी पर खरीद, कलेक्टर रेट बढ़ाने और खाद्य पदार्थों में मिलावट पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर जल्द कदम उठाने की मांग की है.
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