पंजाब में फिर गरजा किसान आंदोलन!पंजाब में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के किसानों ने मोगा में डीसी कार्यालय का घेराव किया. वहीं, किसान मजदूर मोर्चा (KMM) से जुड़े किसानों ने होशियारपुर में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री रवजोत सिंह के कार्यालय के बाहर पांच दिन के धरने की शुरुआत की. किसानों ने कहा है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर बातचीत नहीं की तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा.
भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के आह्वान पर पंजाब के सभी जिलों में डीसी कार्यालयों के बाहर किसानों का धरना सोमवार को 16वें दिन भी जारी रहा. मोगा में बड़ी संख्या में किसान डीसी कॉम्प्लेक्स के गेट के बाहर पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए. किसानों ने डीसी कार्यालय का घेराव करते हुए कहा कि उनका धरना शाम 5 बजे तक जारी रहेगा. किसान नेताओं ने कहा कि इस दौरान किसी भी अधिकारी को कार्यालय से बाहर नहीं आने दिया जाएगा. किसान नेताओं इकबाल सिंह और बलौर सिंह ने कहा कि किसान पिछले 16 दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार के किसी मंत्री या बड़े अधिकारी ने उनसे बातचीत नहीं की है.
किसानों का कहना है कि उनकी कुल 13 प्रमुख मांगें हैं. इनमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करना, लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस लेना और फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा देना शामिल है. किसान कर्ज माफी और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी की भी मांग कर रहे हैं. इसके अलावा किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और बिजली बिल की 20/20 योजना को रद्द करने की मांग भी की जा रही है. किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो शाम 5 बजे के बाद राज्य कमेटी के फैसले के अनुसार आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
उधर, होशियारपुर में किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में किसानों और मजदूरों ने पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री रवजोत सिंह के कार्यालय के बाहर धरना शुरू किया. यह धरना पांच दिनों तक चलाया जाएगा. इस प्रदर्शन में किसान मजदूर मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन (दुआबा), किसान मजदूर संघर्ष कमेटी और किसान मजदूर हितकारी सभा से जुड़े लोग शामिल हुए. किसान संगठनों ने कहा कि उन्होंने पहले ही पंजाब के अलग-अलग जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को अपनी मांगों का ज्ञापन दिया था. अब वे मंत्रियों के कार्यालयों और घरों के बाहर धरना देकर सरकार पर बातचीत का दबाव बना रहे हैं.
बीकेयू दुआबा के प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह राय ने कहा कि किसान संगठन चाहते हैं कि पंजाब सरकार उनकी मांगों पर बातचीत करे. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने बातचीत नहीं की तो 16 सितंबर को किसान संगठनों की बैठक होगी. इस बैठक में आंदोलन को आगे बढ़ाने को लेकर फैसला लिया जाएगा. किसान नेता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया तो रेलवे ट्रैक और हाईवे जाम करने जैसे बड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति बनती है और आम लोगों को परेशानी होती है तो इसकी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी.
किसान नेताओं ने पंजाब में बिजली कटौती का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि इस समय खेतों में खड़ी फसलों को पानी की जरूरत है, लेकिन कई जगह बिना सूचना के बिजली कटौती हो रही है. इससे ट्यूबवेल चलाने में परेशानी हो रही है और फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है. किसानों ने राज्य में कोयले की कमी को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि बिजली की कमी का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि उद्योगों पर भी पड़ रहा है.
किसानों ने मांग की है कि पंजाब सरकार बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू जैसी फसलों की MSP पर खरीद सुनिश्चित करे. किसानों का कहना है कि अगर फसलों का सही दाम नहीं मिलेगा तो खेती करना और मुश्किल हो जाएगा. इसके साथ ही किसान संगठनों ने किसानों और खेत मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग भी रखी है. आत्महत्या करने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई है.
किसानों ने पंजाब में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए मजबूत नीति बनाने की मांग की है. इसके अलावा लगातार गिरते भूजल स्तर और हवा-पानी के प्रदूषण को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाने की मांग की गई है. किसानों ने नदियों के पानी के बंटवारे में नदी वाले राज्यों के अधिकार यानी रिपेरियन सिद्धांत को लागू करने की मांग भी रखी है.
किसान संगठनों ने पंजाब विधानसभा में कुछ कानूनों और केंद्र के प्रस्तावित कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पास करने की मांग की है. इनमें सीड एक्ट 2025, कोऑपरेटिव एक्ट 2026, VB-G RAM G एक्ट और बिजली संशोधन विधेयक 2025 शामिल हैं. किसानों ने पंजाब में प्रीपेड बिजली मीटर लगाने का काम तुरंत रोकने की भी मांग की है.
किसानों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव लाने की मांग की है. इसके साथ ही शंभू और खनौरी किसान आंदोलन के दौरान जब्त किए गए वाहनों और अन्य सामान को वापस करने की मांग भी की गई है. किसान संगठनों ने खेती करने वाले सभी किसानों और मजदूरों को जमीन पर मालिकाना हक देने की मांग की है. इसके अलावा किसान और मजदूर आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए पुलिस और रेलवे के मामलों को वापस लेने की मांग भी की गई है. किसानों ने पराली जलाने से जुड़े मामलों को भी वापस लेने की मांग रखी है. आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई है.
किसान संगठनों ने पंजाब की लैंड पूलिंग पॉलिसी को तुरंत वापस लेने की मांग की है. इसके अलावा भारतमाला परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन जबरन लेने का विरोध भी किया है. किसानों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार को जल्द बातचीत करनी चाहिए. फिलहाल मोगा और होशियारपुर समेत पंजाब के कई हिस्सों में किसानों का प्रदर्शन जारी है. अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और 16 सितंबर को होने वाली किसान संगठनों की बैठक पर है.
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