केंद्र की नीतियों के खिलाफ SKM का नया प्लान (AI Image)केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने राज्यों और विपक्षी दलों को सक्रिय करने की रणनीति तैयार की है. संगठन ने अपने साथ जुड़े किसान-मजदूर संगठनों की राज्य समन्वय समितियों के लिए एक ड्राफ्ट मांगपत्र ज्ञापन जारी किया है, जिसे अलग-अलग राज्यों में मुख्यमंत्री और राज्य के विपक्ष के नेता को सौंपा जाएगा. इस ड्राफ्ट के जरिए केंद्र सरकार के फैसलों को वापस लेने और किसानों के हित में कदम उठाने की मांग रखी जाएगी.
संयुक्त किसान मोर्चा ने इस ड्राफ्ट ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार की मौजूदा नीतियां कृषि, मजदूरों और राज्यों के अधिकारों को कमजोर कर रही हैं. संगठन ने कहा है कि संविधान के मुताबिक, कृषि राज्यों का अपना विषय है, इसके बावजूद केंद्र लगातार ऐसे कानून और नीतियां ला रहा है, जिनसे राज्यों की भूमिका सीमित होती जा रही है. एसकेएम राज्य सरकारों और विपक्षी दलों से आग्रह करेगी कि वे एकजुट होकर केंद्र के खिलाफ साझा रुख अपनाएं.
ड्राफ्ट मांगपत्र में सबसे प्रमुख मुद्दा प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध है. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि यह समझौता देश और किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे घरेलू कृषि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. संगठन ने मांग की है कि राज्य सरकारें केंद्र पर दबाव बनाएं, ताकि इस समझौते पर हस्ताक्षर न किए जाएं. इसके साथ ही संगठन ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पद से हटाने की मांग भी ड्राफ्ट में शामिल की है.
SKM ने ज्ञापन मसौदे में गेहूं और धान किसानों से जुड़े राज्य बोनस का मुद्दा भी उठाया. एसकेएम ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा राज्य बोनस समाप्त करने को लेकर जारी अर्ध-सरकारी पत्र किसानों के खिलाफ है. संगठन ने इस पत्र को वापस लेने की मांग की है और राज्यों से आग्रह किया है कि वे किसानों के हित में इस फैसले का विरोध करें.
ड्राफ्ट ज्ञापन में केंद्र सरकार के 11 वर्षों के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस अवधि में राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता में लगातार गिरावट आई है. संगठन ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की कराधान शक्तियां सीमित हो गई हैं और उन्हें अपने खर्चों के लिए केंद्र पर अधिक निर्भर होना पड़ रहा है. एसकेएम ने विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किए जाने की मांग रखी है, ताकि राज्य कृषि और ग्रामीण विकास के लिए संसाधन जुटा सकें.
संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने “मजबूत राज्य - मजबूत भारत” अभियान के तहत कहा है कि राज्यों को मजबूत किए बिना किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता. ड्राफ्ट में आरोप लगाया गया है कि केंद्र की केंद्रीकरणकारी नीतियां संघीय ढांचे को कमजोर कर रही हैं और इसका सीधा असर कृषि और ग्रामीण आजीविका पर पड़ रहा है.
SKM ने मसौदा ज्ञापन में कई कानूनों और नीतियों काे लेकर भी विरोध दर्ज करने की बात कही है. संगठन ने 4 श्रम संहिताओं, बिजली विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और वीबी जी-राम जी अधिनियम 2025 को किसान और मजदूर विरोधी बताया है. संगठन ने कहा कि इन कानूनों के जरिए योजनाओं का बड़ा वित्तीय बोझ राज्यों पर डाला जा रहा है. इसके साथ ही मनरेगा अधिनियम को पुनर्स्थापित करने की मांग भी की गई है.
एमएसपी को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी फसलों की C2 लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और उस दर पर गारंटीकृत खरीद के लिए कानून बनाने की मांग दोहराई है. संगठन का कहना है कि इससे किसानों की आय को सुरक्षा मिलेगी और ग्रामीण कर्ज संकट से निपटने में मदद मिलेगी.
ड्राफ्ट मांगपत्र में वैकल्पिक कृषि मॉडल का भी उल्लेख किया गया है. एसकेएम ने कहा है कि कॉरपोरेट आधारित मॉडल की जगह राज्य नेतृत्व वाली किसान और मजदूर सहकारिताओं को मजबूत किया जाना चाहिए. संगठन ने कहा कि सहकारी ढांचे, प्रसंस्करण अवसंरचना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सशक्त करने से किसानों को बेहतर मूल्य और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिर आजीविका के अवसर मिल सकते हैं.
संयुक्त किसान मोर्चा ने अंत में राज्य सरकारों और विपक्षी दलों से अपील की है कि वे इस ड्राफ्ट ज्ञापन में उठाई गई मांगों को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से अपनी बात रखें और किसानों, मजदूरों और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं.
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