शिमला के सेब बागवानों ने 24 फरवरी को बुलाई बड़ी बैठक, जमीन अधिकारों के लिए उठाएंगे आवाज

शिमला के सेब बागवानों ने 24 फरवरी को बुलाई बड़ी बैठक, जमीन अधिकारों के लिए उठाएंगे आवाज

जुब्बल में बेदखली अभियान रुकने के बाद सेब उत्पादक संगठनों ने 24 फरवरी को किसान सम्मेलन का एलान किया है. किसानों का आरोप है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नीति बनाए बिना कार्रवाई शुरू की.

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शिमला के सेब बागवानों ने 24 फरवरी को बुलाई बड़ी बैठक, जमीन अधिकारों के लिए उठाएंगे आवाजहिमाचल प्रदेश के सेब किसानों ने जुब्बल में बेदखली अभियान का विरोध किया (फोटो/ANI)

हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानों और किसानों के जमीन अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. शि‍मला के जुब्बल उपमंडल के तहत मंडल पंचायत क्षेत्र में प्रस्तावित बेदखली कार्रवाई के खिलाफ विरोध के बाद अब किसान संगठन 24 फरवरी को बड़ा सम्मेलन करने जा रहे हैं. इस सम्मेलन में राज्य सरकार की नीतियों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी. दरअसल, जुब्बल क्षेत्र के जाखोड़ गांव और रामनगर चक में वन और राजस्व विभाग की टीम शनिवार को कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची थी. 

बागवानों के प्रदर्शन के बाद लौटी टीम

इस कार्रवाई के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों और बागवानों ने मौके पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया. विरोध में हिमाचल सेब उत्‍पादक संघ के शिमला, जुब्बल व रोहड़ू इकाइयों के पदाधिकारी भी शामिल हुए. बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन को पुलिस बल के साथ कार्रवाई रोककर लौटना पड़ा.

सेब उत्पादक संगठनों का आरोप है कि यह बेदखली अभियान सुप्रीम कोर्ट के 16 दिसंबर 2025 के आदेशों की भावना के खिलाफ है. किसानों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को भूमि नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट नीति बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने नीति बनाए बिना ही जमीन खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी.

आरोप- तीन दिन में कार्रवाई के लिए पहुंची टीम

प्रभावित परिवारों ने दावा किया कि 18 फरवरी को बेदखली का नोटिस सिर्फ वॉट्सऐप के माध्यम से भेजा गया और महज तीन दिन के अंदर 21 फरवरी को कार्रवाई के लिए टीम पहुंच गई. नोटिस में यह भी साफ नहीं किया गया कि बेदखली किस कानूनी प्रावधान के तहत की जा रही है. मौके पर मौजूद अधिकारियों से जब किसानों ने जवाब मांगा तो उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई.

हिमाचल प्रदेश एप्‍पल ग्रोअर्स एसोसि‍एशन ने इस पूरी प्रक्रिया को जल्दबाजी भरा और गैरकानूनी बताया. संगठन ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप स्पष्ट नीति नहीं बनती और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों पर अमल नहीं होता, तब तक किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती.

जुब्‍बल के हाटकोटी में बुलाया सम्‍मेलन

इसी मुद्दे को लेकर अब सेब बागवानों और किसानों ने 24 फरवरी को जुब्बल के हाटकोटी में एक सम्मेलन बुलाया है. संगठन ने आम जनता, किसानों और बागवानों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है. सम्मेलन में भूमि अधिकारों की रक्षा, सरकारी नीति पर दबाव और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी. (एएनआई)

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