Animal Cotosis Disease: गाय-भैंस को कोटोसिस से बचाने के लिए करें ये काम, बच्चा देते वक्त रहता है खतरा 

Animal Cotosis Disease: गाय-भैंस को कोटोसिस से बचाने के लिए करें ये काम, बच्चा देते वक्त रहता है खतरा 

Animal Cotosis Disease गर्भवस्था के दौरान या बच्चा होने के बाद पशुओं को जब ग्लूकोज की कमी होती है तो शरीर उसकी कमी को पूरा करने के लिए फैट का ज्यादा इस्तेमाल करने लगता है. ऐसा होने पर ही शरीर में कीटोन बॉडिज बनने लगती है. शरीर का वजन कम होना और दूध उत्पादन घट जाना ही इसका सबसे बड़ा नुकसान है. 

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Animal Cotosis Disease: गाय-भैंस को कोटोसिस से बचाने के लिए करें ये काम, बच्चा देते वक्त रहता है खतरा नई तकनीक की मदद से पुंगनूर गाय के इस बछड़े को जन्म दिया गया है.

जब गाय-भैंस गर्भवती हों तो उनके वजन की निगरानी करना बहुत जरूरी हो जाता है. क्योंकि एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चा देने से पहले या बाद में गाय-भैंस का वजन घटने लगता है. इस तरह से वजन घटना कोई सामान्य नहीं होता है. ये एक बड़ी परेशानी का संकेत होता है. क्योंकि इसे लेकर पशुपालक अगर वक्त से अलर्ट नहीं हुए या फिर कुछ जरूरी उपाय नहीं किए तो फिर इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. एकसपर्ट के मुताबिक ऐसा तब होता है जब गर्भकाल के दौरान गाय को पोषण से भरपूर खुराक दी जाती है. जबकि इस दौरान गाय को घूमने-फिरने और व्यायाम का मौका नहीं मिल पाता है. 

जिसके चलते शरीर में ग्लूकोज की मात्रा घट जाती है और फैट बढ़ जाता है. इसलिए गाय के बच्चा देने से पहले और बच्चा देने के 5-10 दिन तक उसकी देखभाल बहुत जरूरी होती है. क्योंकि कीटोसिस बीमारी उसी गाय को होती है जो दूध का उत्पादन ज्यादा करती है. दूध ज्यादा देने की वजह से उसे खुराक भी ज्यादा और अच्छी दी जाती है. लेकिन लगातार खड़े-खड़े खाते रहने के चलते गाय इस परेशानी की चपेट में आ जाती है. 

ये काम किए तो कोटोसिस से बचेंगी गाय-भैंस 

  • बछड़ा जन्म के समय भूखा या बहुत ज्यादा मोटा नहीं होना चाहिए.
  • प्रारंभिक स्तनपान के समय पर्याप्त कैलोरी का सेवन.
  • बछड़े के जन्म से लगभग चार सप्ताह पहले तक अगले स्तनपान की तैयारी में भोजन देना शुरू नहीं करना चाहिए.
  • बछड़े के जन्म से चार सप्ताह पहले साइलेज या घास दें. चारागाह में चरने जाए तो एक किलो सांद्रता हर रोज दें और धीरे-धीरे बढ़ाकर पांच किलो सांद्रता हर रोज कर दें. 
  • बछड़े के जन्म के बाद, उत्पादन बढ़ने पर सांद्रता बढ़ाएं यानी तीन किलो घास गाय के 100 किलो वजन पर दें, या नौ किलो साइलेज 100 किलो वजन पर दें. इसके साथ ही एक किलो सांद्रता तीन लीटर दूध उत्पादन पर दें.
  • प्रोटीन 16-18 फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए.
  • अच्छी खुराक देने के साथ हर रोज व्यायसम जरूर कराएं. 
  • गीले साइलेज या फफूंद युक्त या धूल युक्त घास से बचें. 
  • दूषि‍त साइलेज या घास में ब्यूटिरेट का लेवल बढ़ जाता है.

कीटोसिस को ऐसे कर सकते हैं नियंत्रित 

छह सप्ताह तक हर रोज 110 ग्राम सोडियम प्रोपियोनेट की रोग निरोधी खुराक दें.
70 दिनों तक 350 मिली प्रति दिन प्रोपलीन ग्लाइकॉल या छह फीसद सांद्रित राशन दें.
स्तनपान के छठे सप्ताह के दौरान रक्त शर्करा और दूध कीटोन का आकलन करें.

कीटोसिस से ऐसे बचेंगी गाय-भैंस

गायों की तरह ही फ़ीड मिश्रण के रूप में 25 मिलीग्राम हर रोज मोनेंसिन सोडियम दें.
सुनिश्चित करें कि गर्भावस्था के दूसरे भाग में पोषण का स्तर बढ़ रहा हो. 
गर्भ के आखि‍र के दो महीनों के दौरान 0.25 किलो प्रति दिन की दर से 10 फीसद प्रोटीन युक्त सांद्रित अंतिम दो सप्ताह के दौरान एक किलो प्रति दिन तक बढ़ रहा हो.

पशु चारे में एकदम से बदलाव न करें 

खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त भोजन देना तय करें.
चारागाह में आश्रय उपलब्ध होना चाहिए.
भेड़ों को प्रतिदिन दो बार अच्छी तरह से खिलाए गए झुंड में बाहर ले जाना चाहिए.
यदि चारागाह उपलब्ध है, तो केवल सांद्रित भोजन ही खिलाना चाहिए.

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