
किसान नरेंद्र चौहान ने बताया कि 5 साल पहले उन्होंने पालमपुर विश्विद्यालय से लाकर अन्ना और डोरसेट गोल्डन एप्पल की वैरायटी के पौधे अपने खेत में लगाए थे और उनकी अच्छी देखभाल की.

नरेंद्र ने बताया कि इस साल लगातार दूसरी बार है, जब उनके सेब के पेड़ों पर ज्यादा अच्छे फल उग रहे हैं. इतना ही नहीं पिछले साल के मुकाबले इस साल ज़्यादा सेब उगे हैं. ये सेब 10-15 जून तक पककर पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे.

किसान नरेंद्र चौहान ने कहा उन्होंने हरियाणा को भी ‘जम्मू-कश्मीर’ बना दिया है. यहीं पर भरपूर और अच्छी क्वालिटी का सेब का उत्पादन हो रहा है. किसान ने कहा कि पालमपुर की यूनिवर्सिटी से पौधे लाकर किसी किसान ने सेब उगाए थे.

इसकी जानकारी मिली तो वह भी पालमपुर यूनिवर्सिटी पहुंचे और जानकारी लेकर करनाल में पौधे लगाए थे. इसमें तीसरे साल में पेड़ पर फल आ गए थे. इसके बाद उन्होंने अन्य किसानों को भी सेब की खेती के लिए जागरूक किया. उन्होंने कहा एक सेब के पेड़ से 60 से 80 किलोग्राम फलों का उत्पादन हासिल कर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

नरेंद्र चौहान ने बताया कि यहां किसानों ने अन्ना और डोरसेट गोल्डन वैरायटी में पानी बहुत कम चाहिए होता है. हमारे यहां बहुत से किसान इसकी जानकारी लेने आते हैं और बागवानी से जुड़ी जानकारी भी हासिल करते हैं.

किसानों को यहां पूरी जानकारी दी जाती है और किस तरह की मिट्टी का प्रयोग करें, उसकी टेस्टिंग करने के बाद किसानों को खेती करने का सुझाव दिया जाता है.

सेब की खेती करने वाले किसान नरेंद्र ने कहा कि बाकी किसानों को भी गेहूं , धान के अलावा फलों की भी खेती करनी चाहिए. यहां से सेब के पौधों को गुजरात, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक के अलावा दूसरे देशों के किसान को श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल तक भेजे गए हैं. यहां भी किसान आकर उनसे सलाह लेते हैं कि मैदानी इलाकों में किस तरीके से सेब की खेती की जा सकती है.
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