प्याज के दाम को लेकर बवालमहाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के वैजापुर में सोमवार को समृद्धि महामार्ग के इंटरचेंज पर माहौल थोड़ा गर्म हो गया. वजह थी-प्याज के सही दाम की मांग. दरअसल, शिवसेना (UBT) ने प्याज किसानों के समर्थन में रास्ता रोको आंदोलन किया. पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए. शिवसैनिकों ने समृद्धि महामार्ग पर जाम लगा दिया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्याज उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल रहा है, जिससे वे आर्थिक संकट में हैं. इसी मांग को लेकर उन्होंने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया. कुछ समय तक हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा और पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की.
प्रदर्शन के दौरान शिवसैनिकों ने समृद्धि महामार्ग पर टायर जलाए और कुछ समय के लिए कई वाहनों की आवाजाही रोक दी. आंदोलनकारियों ने गले में प्याज की माला पहनकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसानों को प्याज का उचित भाव नहीं मिल रहा है. बाजार में प्याज के दाम इतने गिर चुके हैं कि किसानों को माल बाजार तक ले जाने का भाड़ा तक नहीं निकल पा रहा है.
शिवसेना UBT नेताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है और उन्हें न्याय नहीं मिल रहा. मीडिया से बातचीत करते हुए अंबादास दानवे ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि प्याज 12 रुपये किलो बिक रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. उन्होंने कहा कि किसानों को बेहद कम दाम मिल रहे हैं और इसी आर्थिक संकट के कारण गंगापुर क्षेत्र के एक किसान ने आत्महत्या तक कर ली.
अंबादास दानवे ने मांग की है कि किसानों के प्याज को उचित समर्थन मूल्य दिया जाए और नेफेड द्वारा अच्छे दामों पर खरीद की जाए. हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से इस आंदोलन की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद शिवसैनिक महामार्ग पर पहुंच गए और आंदोलन शुरू कर दिया. कुछ देर बाद मौके पर मौजूद पुलिस ने आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस वैन के जरिए थाने भेज दिया. बाद में समृद्धि महामार्ग पर यातायात दोबारा शुरू कर दिया गया, हालांकि इस दौरान यात्रियों को कुछ समय तक परेशानी और इंतजार का सामना करना पड़ा. (इसरारुद्दीन चिश्ती की रिपोर्ट)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today