प्रधानमंत्री मोदी की बैठक के बाद एक्शन में कृषि मंत्रालय, शिवराज चौहान ने दिए खास निर्देश

प्रधानमंत्री मोदी की बैठक के बाद एक्शन में कृषि मंत्रालय, शिवराज चौहान ने दिए खास निर्देश

शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए.

Advertisement
प्रधानमंत्री मोदी की बैठक के बाद एक्शन में कृषि मंत्रालय, शिवराज चौहान ने दिए खास निर्देशशिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि सरकार की योजनाओं का असर सिर्फ कागजों और फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका लाभ सीधे लोगों के जीवन में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों, गरीबों, ग्रामीणों और आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या अपनी समस्याओं का समाधान कराने के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े. इसके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जो सुनियोजित, समय पर काम करने वाली वाली हो. शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों तक योजनाओं का लाभ आसानी से और तेजी से पहुंचाना है.

एक्शन मोड में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए. इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए.

उन्होंने कहा कि अभी अलग-अलग योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग सिस्टम, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है. इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया है, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, जनप्रतिनिधियों के और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करें.

शिकायत निवारण बने टॉप प्रायोरिटी- शिवराज सिंह

कृषि मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का समाधान केवल कागज पर 'डिस्पोजल' दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह देखा जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो. बैठक में शिवराज सिंह ने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था. उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि कठिन है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा.

शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी. उन्होंने कहा कि महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए. PM मोदी द्वारा रिफॉर्म्स पर दिए जा रहे लगातार जोर का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा.

नियम-प्रक्रिया को बनाएं सरल- कृषि मंत्री

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकारी कामकाज को आसान बनाया जाना चाहिए और पुराने और बेकार नियमों को खत्म करना जरूरी है. उन्होंने सवाल उठाया कि हर काम के लिए लाइसेंस लेना क्यों जरूरी है, जबकि कई जगह सिर्फ पंजीकरण या सरल प्रक्रिया से भी काम हो सकता है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एक हफ्ते के अंदर उन सभी नियमों और प्रक्रियाओं की पहचान करें जो योजनाओं में रुकावट पैदा कर रहे हैं या जिनमें सुधार की जरूरत है, ताकि उन पर जल्दी फैसला लिया जा सके और कामकाज तेज हो सके.

बैठक में AI और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर महत्वपूर्ण रूप से बात करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए. उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है. बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके.

कोर्ट केस, फाइल कल्चर और ड्राफ्टिंग का हो सुधार

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रशासनिक काम करने के तरीके में बदलाव की बात कही है. उन्होंने कहा कि फाइलें नीचे से बनकर ऊपर तक जाती हैं, लेकिन कई बार नीचे के स्तर पर पुरानी सोच के कारण पूरा काम अटक जाता है, इसलिए सुधार सिर्फ ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से ही जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि फाइल बनाने, नोट लिखने, निर्णय की तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता बेहतर होनी चाहिए. इसके लिए ऐसे अधिकारियों को तैयार करना जरूरी है जो साफ, सही और नीति के अनुसार फाइलें तैयार कर सकें. इसके लिए ट्रेनिंग और क्षमता बढ़ाने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि फाइलें बिना वजह न रुकें और फैसले भी जल्दी और बेहतर तरीके से हो सकें.

न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी शिवराज सिंह ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता. उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान और समाधान पर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर डिवीजन यह बताएं कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह कवायद एक साथ चलनी चाहिए- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म भी.

उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं अच्छी होती हैं, सुधार भी किए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी ही नहीं होती, इसलिए हितधारकों से संवाद, किसान संगठनों के साथ बैठक, मजदूरों और सरपंचों से बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो, रील्स और रचनात्मक संचार माध्यमों से योजनाओं और सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए. बैठक में यह भी कहा गया कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका 'रिफॉर्म उत्सव' की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है.  

राज्यों से साझेदारी पर शिवराज सिंह ने दिया जोर

आईसीएआर में पदोन्नति से जुड़ी नई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब केवल शोध-पत्रों के आधार पर नहीं, बल्कि जमीन पर किए गए काम और उसके प्रभाव को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. उन्होंने इसे कार्यसंस्कृति बदलने वाला बड़ा सुधार बताया और कहा कि ऐसे सुधारों को घर के भीतर सीमित न रखकर किसान और जनता तक पहुंचाना चाहिए. शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया. उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, जोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए. उन्होंने संकेत दिया कि जो राज्य संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र का दायित्व पूरे देश की जनता के प्रति है.

उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई. उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा.  बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी बल दिया गया. शिवराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना 2047 विजन, इस वर्ष के लक्ष्य, वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि मॉनिटरिंग मजबूत हो और काम का आकलन स्पष्ट रूप से हो सके. उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि जहां काम हो चुका है और जहां बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

12 साल की उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और समग्र 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी बैठक में चर्चा हुई. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विभाग अपनी उपलब्धियों को अभी से व्यवस्थित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही गांव स्तर तक जाने वाले कार्यक्रम, प्रेजेंटेशन, रचनात्मक कंटेंट, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता के बीच ले जाएं. उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए छोटे वीडियो, ग्राफिक्स, लाभार्थी कहानियों और योजनाओं से जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखने का सुझाव दिया. उनका मानना था कि अखबार और टीवी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दमदार प्रस्तुतीकरण आज ज्यादा असरकारी हो सकता है.  

बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव आगे आएं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय प्राथमिकता देश के भीतर काम की गति, गुणवत्ता और परिणाम को बेहतर बनाना है.  फाइलों के निस्तारण को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममूलक निर्णय है. उन्होंने कहा कि कोई भी नियम या फाइल कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकती है, इसलिए उसे समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे अनावश्यक देरी न हो और महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते चर्चा हो सके.  

बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए. शिकायत निवारण से लेकर रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके. 

POST A COMMENT