पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तेजीपंजाब में सरकार और प्रशासन की चेतावनी के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. पिछले एक हफ्ते में इन मामलों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. 29 अक्टूबर को एक ही दिन में पराली जलाने के 194 नए मामले सामने आए हैं. इसके बाद राज्य में कुल घटनाओं का आंकड़ा बढ़कर 1,007 हो गया है. इनमें से 672 मामले सिर्फ तीन जिलों तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर में दर्ज किए गए हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पराली जलाने की सबसे ज्यादा 397 घटनाएं तरनतारन जिले में सामने आई हैं. इसके बाद अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले दर्ज किए गए हैं. यानी राज्य में सामने आई कुल 1,007 घटनाओं में से 672 मामले इन्हीं तीन जिलों के हैं. आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 542 घटनाएं दर्ज की गई थीं. वहीं, 28 अक्टूबर तक यह संख्या बढ़कर 813 हो गई थी. इसके बाद 29 अक्टूबर को 194 नए मामले सामने आने से कुल आंकड़ा 1,007 तक पहुंच गया.
पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई भी की जा रही है. अब तक 349 मामलों में पर्यावरण मुआवजे के तौर पर 17 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है. इसमें से 13 लाख रुपये से अधिक की वसूली भी हो चुकी है. इसके अलावा, पराली जलाने से जुड़े मामलों में 246 एफआईआर दर्ज की गई हैं. इनमें सबसे ज्यादा 165 एफआईआर तरनतारन और 24 अमृतसर में दर्ज हुई हैं. ये मामले भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दर्ज किए गए हैं. यह धारा सरकारी अधिकारी की ओर से जारी आदेशों का पालन नहीं करने से जुड़ी है.
पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की एक उच्चस्तरीय टीम ने पिछले सप्ताह अमृतसर और तरनतारन का दौरा किया था. आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा के नेतृत्व में टीम ने दोनों जिलों के उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की. इस बैठक में पराली के बेहतर प्रबंधन और खेतों में आग लगाने की घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा हुई. टीम ने यह भी देखा कि जिलों में पराली को खेतों में ही इस्तेमाल करने और खेतों से बाहर ले जाकर उपयोग करने के लिए कितनी सुविधाएं उपलब्ध हैं.
बैठक में आयोग ने कहा कि पराली का इस्तेमाल थर्मल पावर प्लांट, ईंट भट्ठों और उन उद्योगों में बढ़ाया जाना चाहिए, जहां इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे पराली जलाने की घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है. आयोग ने अधिकारियों को गांवों का नियमित दौरा करने के निर्देश भी दिए. साथ ही कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनें और जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उन्हें फसल अवशेष जलाने की जरूरत न पड़े.
तरनतारन में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले सामने आने के कारण आयोग ने जिले के उपायुक्त को इस मुद्दे पर विशेष ध्यान देने को कहा है. अधिकारियों को जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने और किसानों को पराली प्रबंधन के विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. बता दें कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी हर साल 15 सितंबर से शुरू होती है. यह धान की सरकारी खरीद शुरू होने से करीब दो सप्ताह पहले का समय होता है. इस बार बढ़ते मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. (PTI)
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