संतरा किसानों का विरोधमहाराष्ट्र के अमरावती जिले के प्रमुख संतरा उत्पादक क्षेत्र मोर्शी तहसील में संतरा उत्पादक किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया. क्रांतिकारी किसान संगठनों के नेतृत्व में किसानों ने मोर्शी तहसील कार्यालय पर संतरा फेंक कर आंदोलन किया और सरकार का ध्यान संतरा उत्पादकों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया. आंदोलनकारी किसानों ने संतरा बागों को बचाने के लिए सरकार से तत्काल विशेष योजना लागू करने, 24 घंटे बिजली और पानी की स्वतंत्र व्यवस्था करने और पिछली ओलावृष्टि से हुए नुकसान के लिए बकाया सहायता राशि जल्द से जल्द किसानों को देने की मांग की.
विदर्भ के प्रमुख संतरा उत्पादक क्षेत्र मोर्शी में संतरा की खेती वहां के किसानों की आजीविका का आधार है. किसानों का कहना है कि संतरा बागों को बचाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए. खेती के लिए पर्याप्त बिजली और पानी उपलब्ध कराने के साथ संतरा उत्पादकों की समस्याओं के स्थायी समाधान की जरूरत है.
किसानों ने पिछली ओलावृष्टि और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान के लिए घोषित सहायता राशि का अब तक बकाया भुगतान जल्द करने की मांग उठाई. किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से फसलों और संतरा बागों को नुकसान होने के बाद आर्थिक परेशानियां बढ़ जाती हैं. ऐसे में सहायता राशि मिलने में देरी से किसानों की मुश्किलें और बढ़ती हैं, इसलिए सरकार को लंबित मुआवजे की राशि जल्द से जल्द किसानों के खातों में जमा करनी चाहिए.
आंदोलनकारियों ने संतरा बागों के संरक्षण और किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए अलग से विशेष पैकेज घोषित करने की मांग की. किसानों के मुताबिक, संतरा खेती की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार को दीर्घकालीन योजना बनानी चाहिए, ताकि बागों को बचाया जा सके और किसानों को राहत मिल सके. वहीं, किसान तक का सवाल है कि संतरा उत्पादकों की मांगों पर सरकार कब फैसला लेगी? किसानों को विशेष पैकेज, 24 घंटे बिजली-पानी और ओलावृष्टि की लंबित सहायता राशि कब तक मिलेगी?
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today