किसान नेता राकेश टिकैत (फाइल फोटो)इस बार के बजट को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने उम्मीद जताते हुए कहा है कि किसानों को सही भाव मिलना चाहिए चाहे वह दूध का किसान हो, मछली का किसान हो ,पोल्ट्री का किसान हो. उन्होंने कहा कि जमीन के भाव बढ़ रहे हैं लेकिन फसलों के भाव नहीं बढ़ रहे हैं उसी से सारी दिक्कत हो रही है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि एक जिले में कुछ ट्रैक्टरो पर छूट मिलती है ये छूट सभी ट्रैक्टरों पर होनी चाहिए. बिजली पर सोलर पैनल पर छूट मिले देश की एनर्जी बचानी है तो रूट ऑफ सब्सिडी को बढ़ाना होगा.
फसल बीमा योजना का लाभ किसान को कम मिल रहा है, ये समस्या पूरे देश में है. हिमाचल हो कश्मीर हो उत्तराखंड हो. इन हिल्स स्टेट की भी पॉलिसी बने क्योंकि वहां से लोग बहुत तेजी से पलायन कर रहे हैं. खासकर उत्तराखंड और कश्मीर की करें तो वहां बागवानी ज्यादा है. इस बार सेब और दूसरी फसलों की खेती करने वाले किसानों को बहुत नुकसान हुआ है. सड़क बंद होने के कारण किसानों को बहुत नुकसान होता है. उसकी भरपाई सरकार को करनी चाहिए और उन्हें ट्रांसपोर्ट सब्सिडी मिलनी चाहिए.
भूमि अधिग्रहण पर 2013 के बाद सर्किल रेट नहीं बढ़े हैं, सर्किल रेट बढ़े तो किसानों को फायदा होगा नहीं तो देश भर में आंदोलन होंगे. फिर चाहे छत्तीसगढ़ में पोलमाइन के आंदोलन हो, हाईवे बनाने के आंदोलन हो. इसके अलावा शामली से गोरखपुर के लिए गंगा एक्सप्रेस वे निकल रहा रहा है. इसमें अगर भूमि अधिग्रहण का अगर उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तो आंदोलन होगा.
राकेश टिकैत ने कहा कि मेरी मानें तो मैं उम्मीद करता हूं कि हमें कृषि के नाम पर गांव का बजट भी दे दें, क्योंकि गांव और कृषि एक ही है. चाहे वह मजदूर हो गांव में रहने वाला या पशुपालन करने वाला किसान हो उसको लाभ मिलना चाहिए. उसकी मॉनिटर हो. इसके अलावा उन्होंने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून के लिए हम बार-बार बात कर रहे, और उसमें बजट बढ़ाने की भी बात नहीं है, उसमें कानून बनाने की बात है. अब बजट बढ़े तो सब्सिडी मिल जाए.
हमने एक चीज और बताई है कि जो खेत की बिजली है. उस पर बड़ी आफत रहती है. हम खेत में बिजली यूज़ कर ले और उतने ही पावर के सोलर पैनल हम गांव में लगा ले, और गांव से लाइट ग्रेड में दे दें तो उस पर छूट मिल जाए. यह सुझाव हमने सरकार को दिया है कि हमारे पास 10 किलोवाट की खेत में ट्यूबवेल है. 10 किलो वाट की अपने घर पर पैनल लगाएं और गांव में उसकी लाइट हम ग्रेड में दे दें. जिससे हमें वहां लाइट फ्री मिल जाए, क्योंकि हमारा क्षेत्र गन्ने वाली है.
फसल बीमा योजना का लाभ कम मिल रहा.उन्होंने कहा कि हम अभी हरियाणा में सिरसा, हिसार, फतेहयाबाद इन जिलों में गए थे. वहां पर बड़ी समस्या है. दरअसल, वहां कि जमीन लो लैंड वाली जमीन है, जिससे वहां फसलों को बहुत नुकसान होता है. ऐसे में किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ मिलना चाहिए.
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