
राकेश टिकैत उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले सिसौली स्थित किसान भवन में आयोजित चार दिवसीय प्राकृतिक खेती शिविर के अंतिम दिन देशभर से आए किसानों को खेती से जुड़ी नई और आसान जानकारी दी गई. इस दौरान मशहूर कृषि विशेषज्ञ सुभाष पालेकर ने किसानों को गन्ने की खेती को प्राकृतिक तरीके से करने पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी. उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि, जल और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. ऐसे में प्राकृतिक खेती ही एक सशक्त विकल्प है, जिससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ उत्पादन की क्वालिटी भी बेहतर होती है और जीवन स्वस्थ बना रहता है. वहीं, राकेश टिकैत ने कहा कि अब प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर जन आंदोलन चलाया जाएगा.
अपने संबोधन में सुभाष पालेकर ने कहा कि उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, आच्छादन (मल्चिंग) और प्राकृतिक कीट नियंत्रण के प्रयोगों को अपनाने पर विशेष जोर दिया. साथ ही उन्होंने वर्मी कंपोस्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करता है. इससे किसानों की लागत घटती है और उत्पादन की क्वालिटी में सुधार होता है.

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत भी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे. इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अब प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर जन आंदोलन चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि संगठन किसानों को जागरूक करने के लिए देशभर में अभियान चलाएगा, जिससे किसान रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को समझकर प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हों. उन्होंने विश्वास जताया कि इससे किसानों की लागत में कमी आएगी और उनकी आय में वृद्धि होगी.
अलग-अलग राज्यों से आए किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाएं दूर कीं. वहीं, इस चार दिवसीय शिविर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. अंत में किसानों ने संकल्प लिया कि वे प्राकृतिक खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे.
चार दिवसीय इस प्रशिक्षण शिविर में देश के 13 राज्यों से आए किसानों ने प्रतिभाग किया. कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र दिया गया. शिविर का समापन सफलतापूर्वक हुआ और उपस्थित किसानों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया.
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