Success story: चंदौली के मदनजीत सिंह का मछली पालन मॉडल, 100 टन पैदावार और करोड़ों के टर्न ओवर से पेश की मिसाल

Success story: चंदौली के मदनजीत सिंह का मछली पालन मॉडल, 100 टन पैदावार और करोड़ों के टर्न ओवर से पेश की मिसाल

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के रहने वाले मदनजीत सिंह आज मछली पालन में देश में एक बड़ा नाम बन चुके हैं. साल 2010-11 में महज 2 हेक्टेयर जमीन से अपना सफर शुरू करने वाले मदनजीत के पास कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं थी, लेकिन अपनी मेहनत और सही तकनीक' के सपोर्ट से उन्होंने इस कारोबार को 8 हेक्टेयर तक फैला दिया है. आधुनिक तकनीक को अपनाकर वो आज सालाना 1000 क्विंटल से ज्यादा मछली पैदा कर रहे हैं, जिससे उनका सालाना टर्नओवर करीब 1.15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. मदनजीत सिर्फ खुद की तरक्की तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने एक 'मेंटर' की तरह इलाके के 40 से ज्यादा किसानों को ट्रेनिंग दी और कई बेरोजगारों को काम भी मुहैया कराया है.

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चंदौली के मदनजीत सिंह का मछली पालन मॉडल, 100 टन पैदावार और करोड़ों के टर्न ओवर से पेश की मिसालमछली पालन में किसान ने पेश की मिसाल

उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली में एक छोटा सा गांव है बर्थरा कला. इसी गांव के रहने वाले मदनजीत सिंह ने आज मछली पालन में देश प्रदेश में अपना बड़ा नाम बना लिया है. मदनजीत सिंह ने अपने इस कारोबार की शुरुआत साल 2010-11 में बहुत ही छोटे स्तर पर की थी. उस समय उनके पास सिर्फ 2 हेक्टेयर जमीन थी, जिस पर उन्होंने तालाब बनवाकर काम शुरू किया. उन्होंने किसी बड़े संस्थान से कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली थी, लेकिन उनके अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा था. उन्होंने लगातार अपने तालाबों की निगरानी की और अपनी गलतियों से सीखा. आज अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने इसे बढ़ाकर 8 हेक्टेयर कर लिया है. शुरुआत में जहां वे सिर्फ 60 क्विंटल मछली ही पैदा कर पाते थे, वहीं आज वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर वो हर साल लगभग 1000 क्विंटल से भी ज्यादा मछली का उत्पादन कर रहे हैं. 

चंदौली के किसान ने मछली पालन में कमाया नाम

मदनजीत सिंह की सफलता में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का बहुत बड़ा हाथ रहा है. साल 2020-21 में मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने जब उनके तालाब का दौरा किया, तो उन्होंने मदनजीत जी को आधुनिक और वैज्ञानिक ढंग से मछली पालन करने के लिए काफी प्रोत्साहित किया. विभाग के दिशा-निर्देशों पर चलते हुए उन्होंने 'बायो फ्लॉक' तकनीक को अपनाया और अपनी माता लालमनी देवी के नाम से बायो फ्लॉक पॉन्ड का निर्माण करवाया.

इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से लगभग 20.40 लाख रुपये का अनुदान भी मिला. इस आधुनिक तकनीक और जिंदा मछली विक्रय केंद्र की मदद से उनका कारोबार और भी ज्यादा फैल गया. आज वे अपने तालाबों में फंगास, रोहू, भाकुर और मृगाल जैसी बेहतरीन किस्म की मछलियां पाल रहे हैं. 

अब दूसरों को भी बना रहे 'लखपति' किसान

मदनजीत जी की खासियत यह है कि वो सिर्फ अपनी तरक्की तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने अपने आसपास के समाज को भी साथ लेकर चलने की सोची. आज वो एक 'मेंटर' की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने चंदौली जिले के लगभग 40 से ज्यादा किसानों को ट्रेनिंग दी है और उन्हें तकनीकी जानकारी मुहैया कराई है. वो न केवल उन्हें रास्ता दिखाते हैं, बल्कि उन्हें अच्छी क्वालिटी का मछली का फीड और बीज दिलाने में भी मदद करते हैं.

उन्होंने कई किसानों को इस बात के लिए राजी किया कि मछली पालन परंपरागत खेती के मुकाबले कहीं ज्यादा मुनाफे का सौदा है. उनकी इसी कामयाबी को देखकर आसपास के गांवों के लोग भी अब बड़े पैमाने पर मछली पालन करने लगे हैं. 

मदनजीत सिंह बने मछली पालन के गुरु

मदनजीत सिंह के इस नेक काम से न केवल किसानों की सोच बदली है, बल्कि गांव के बेरोजगारों को काम भी मिला है. उनके तालाबों और मछली पालन के काम से 10 से 20 लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है. आर्थिक रूप से देखा जाए तो मदनजीत जी की सालाना शुद्ध आय अब 40 से 45 लाख रुपये के करीब पहुंच गई है. सिर्फ वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही उन्होंने लगभग 1150 क्विंटल फंगास मछली का उत्पादन किया, जिससे उन्हें करीब 1 करोड़ 15 लाख रुपये की कुल बिक्री हासिल हुई. यह भारत सरकार के उस सपने के मुताबिक है जिसमें किसानों की आय को दोगुना करने और गांव के हर तबके का विकास करने की बात कही गई है. 

सीखिए मुनाफे वाली फिश फार्मिंग

मदनजीत अपने अनुभव के आधार पर नए मछली पालकों को बहुत ही कीमती सुझाव देते हैं. उनका कहना है कि सबसे पहले अपने तालाब की मिट्टी और पानी की समय-समय पर जांच करानी चाहिए. अगर मिट्टी या पानी में कोई कमी दिखे, तो विशेषज्ञों की मदद लेकर उसे तुरंत ठीक करना चाहिए. वो कहते हैं कि तालाब के साथ-साथ एक नर्सरी का होना बहुत जरूरी है. मछली के छोटे बच्चों यानी बीज को सीधा बड़े तालाब में डालने के बजाय, पहले नर्सरी में पालना चाहिए और जब वो थोड़े बड़े हो जाएं, तभी उन्हें मुख्य तालाब में डालना चाहिए. इसके अलावा, मछलियों को नियमित रूप से सही और अच्छी क्वालिटी का आहार देना चाहिए, लेकिन दाना देने से पहले पानी के रंग और प्लैंक्टन की जांच जरूर कर लेनी चाहिए. 

मछली पालन का चंदौली मॉडल

आने वाले वक्त के मछली पालकों के लिए मदनजीत जी का संदेश बहुत साफ है. वो सलाह देते हैं कि लोगों को आई.एम.सी. यानी इंडियन मेजर कार्प्स की खेती पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि इसमें मुनाफा काफी अच्छा है. साथ ही वो इस बात पर जोर देते हैं कि मछलियों की क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए. वो एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल के सख्त खिलाफ हैं क्योंकि इससे न केवल मछली की क्वालिटी खराब होती है, बल्कि विदेशों में मछली निर्यात करने के मौके भी कम हो जाते हैं. मदनजीत जी का मानना है कि अगर सही गहराई और सही मात्रा में बीज डालकर वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए, तो कोई भी किसान अपनी किस्मत बदल सकता है.

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