पराली जलाने वालों पर ड्रोन की नजरहरियाणा के करनाल जिले में धान की कटाई का काम तेजी से चल रहा है. जिले में अब तक करीब 25 फीसदी धान की कटाई पूरी हो चुकी है. राहत की बात यह है कि अभी तक पराली जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है. लेकिन फिर भी किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग और प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है. करनाल में इस बार पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है. सुबह और शाम ड्रोन के जरिए खेतों की निगरानी की जा रही है.
इसके अलावा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक करने के लिए 750 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में लगाए गए हैं. कृषि विभाग के मुताबिक, जिले में करीब 4 लाख 50 हजार एकड़ में धान की फसल लगी हुई है, जैसे-जैसे कटाई आगे बढ़ेगी, पराली प्रबंधन पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी.
कृषि विभाग ने साफ किया है कि अगर कोई किसान पराली जलाता है तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी. किसान का चालान करने के साथ मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री की जाएगी. विभाग के मुताबिक, रेड एंट्री होने पर किसान अगले दो साल तक अपनी फसल को एमएसपी पर नहीं बेच पाएगा. जरूरत पड़ने पर किसान के खिलाफ मामला भी दर्ज किया जा सकता है. हालांकि, अब तक 25 फीसदी धान की कटाई होने के बावजूद पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है. इसे कृषि विभाग के लिए राहत की बात माना जा रहा है.
सरकार किसानों को पराली न जलाने और फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए आर्थिक मदद भी दे रही है. किसानों को प्रति एकड़ 1,200 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है. इसके अलावा किसान पराली को करीब 2,500 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकते हैं. जिले में किसानों के लिए पराली प्रबंधन की पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध होने का भी दावा किया गया है. अधिकारियों के अनुसार, करीब 3,500 गांवों के लिए 4 हजार से ज्यादा मशीनें उपलब्ध हैं.
कृषि विभाग किसानों को पराली जलाने के नुकसान के बारे में भी लगातार जागरूक कर रहा है. इसके लिए गांवों में कैंप लगाए जा रहे हैं. स्कूलों में बच्चों के बीच भाषण और स्लोगन प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं. अधिकारियों के मुताबिक, पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ खेतों में मौजूद मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता पर असर पड़ सकता है. वहीं, अगर किसान पराली को खेत में ही मिला देते हैं तो इससे मिट्टी को प्राकृतिक जैविक पदार्थ मिलता है और उसकी क्वालिटी में सुधार हो सकता है. फिलहाल करनाल में धान की कटाई जारी है और प्रशासन की नजर पराली जलाने की घटनाओं पर बनी हुई है.
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