Paddy Procurement Odishaओडिशा में इस बार सरकारी दर पर धान की खरीद में लगातार कई तरह का विवाद सामने आ रहा है. इस बार किसानों में धान खरीद में धीमी गति को लेकर किसानों में रोष देखा जा रहा है. धान खरीद में धीमी गति के कारण किसानों को परेशानी हो रही है. किसानों का कहना है कि उन्हें फिलहाल रबी फसल की खेती करने के लिए पैसों जरूरत पर धान खरीद में हो रही देरी कारण उन्हें पैसे नहीं मिल पा रहे हैं. धान खरीद में हो रही देरी समेत मंडी से धान उठाव की मांग को लेकर कोरापुट जिले के बोरीगुम्मा प्रखंड के अंतर्गत ताराभाटा मंडी में किसानों से धरना दिया है. इस दौरान किसानों ने जल्द से जल्द धान उठाव करने की मांग की.
धरना दे रहे किसाननों का आरोप है कि सरकार और आपूर्ति विभाग किसानों की दुर्दशा पर आंखे मूंदी हुई है. इसके कारण मिल मालिक अपनी मनमानी कर रहे हैं और धान उठाने में अत्यधिक देरी कर रहे हैं. इतना ही नहीं किसानों ने मिल मालिकों पर आरोप लगाया कि जब भी मिलर्स धान खरीदने के लिए आते हैं तो वो धान की गुणवत्ता के नाम पर कटनी-छंटनी का सहारा लेते हैं और प्रति क्विंटल चार किलोग्राम तक धान की कटौती की जाती है. ओडिशा टीवी के मुताबिक किसानों ने कहा कि मिलर्स उनसे सिर्फ 80-90 फीसदी धान की ही खरीद करते हैं, बाकि धान का किसानों को नुकसान हो जाता है.
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ताराभाटी मंडी में धरना दे रहे एक किसान ने कहा कि धान बेचने के लिए उन्हें 15 दिसंबर को ही टोकन जारी किया गया है. पर अभी तक उनका धान नहीं बिका है. जब भी मिलर्स धान उठाने के लिए तो धान की घटिया क्वालिटी का हवाला 10 फीसदी धान छोड़ देते हैं. किसान ने पूछा की उस बचे हुए धान को किसान कहां बेचेंगे. वहीं एक अन्य किसान ने बताया कि ताराभाटी मंडी में 22 दिसंबर से धान की खरीद शुरू की गई है. पर मंडी में अभी तक फूल एवेरज क्वालिटी (एफएक्यू) जांच करने के लिए कोई मशीन नहीं लगाई गई है.
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सूत्रों ने कहा कि राज्य में विभाग द्वारा 14 दिसंबर को खरीफ मंडियां शुरू करने की घोषणा की थी पर इसके बावजूद धान की खरीद सही समय पर शुरू नहीं हुई. किसानों के कई विरोधों के बाद जब धान की खरीद शुरू हुई तो मिलर्स अपनी मनमानी कर रहे हैं. यही वजह है कि आज भी राज्य के कई जिलों के मंडियों में धान के हजारों बोरे उठाव का इंतजार कर रहे हैं. सभी बोरे खुले में रखे हुए हैं.
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