क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट एरिया में बदलाव पर बवालराजस्थान के अलवर जिले में स्थित क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) के मुद्दे को लेकर बुधवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित बैठक में माहौल बेहद हंगामा भरा रहा. बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और अपनी जमीन, आजीविका और भविष्य को लेकर गहरी चिंता जाहिर की. इस दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. पर्यावरण प्रेमी लोगों ने सरकार से एक ही सवाल पूछा कि आखिर सीटीएच का एरिया क्यों बदला जा रहा है. अभी हाल ही में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए 18 करोड़ के घोटाले वाले अधिकारी भी बैठक में आए हैं.
जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने सरकार पर फसल बर्बाद करने का आरोप लगाया है. किसानों ने यहां तक कहा कि आप कहें तो हम इलाका ही छोड़ जाएं. ग्रामीणों ने बताया कि सरकार द्वारा जिस इलाके को CTH में जोड़ा जा रहा है. वहां पहले से ही वन्यजीवों से किसान परेशान हैं. उनकी फैसले बर्बाद हो रही है और किसानों के सामने आर्थिक संकट भी है. उन्होंने सरकार से सवाल किया की सरकार को चाहिए कि वन्यजीवों की प्रॉपर मॉनिटरिंग करें और चारदीवारी बनवाए जिससे जंगल से वन्यजीव खेतों की ओर न घुसें.
सरकार का ध्यान सिर्फ किसानों को बर्बाद करने पर है. उन्होंने कहा कि किसानों के पास छोटी-छोटी जमीन है. किसान अपना पेट कैसे भरेंगे, क्योंकि सारे फसलों को वन्य जीव चौपट कर रहे हैं. सरकार द्वारा मांगी गई आपत्तियों को लेकर उन्होंने कहा कि हम नए सीटीएच एरिया में शामिल होने के लिए तैयार नहीं हैं. इस पर विचार करें और अगर सरकार ने जबरदस्ती की तो बड़ा आंदोलन भी किया जा सकता है.
मीडिया से बातचीत करते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि CTH के नाम पर सरकार और प्रशासन जनता को गुमराह कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है, लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है. जूली ने सवाल उठाया कि क्या अधिकारी इस मामले में मिले हुए हैं या फिर किसी दबाव में काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अलवर जिले से दो मंत्री होने के बावजूद इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है.
टीकाराम जूली ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ी तो इस लड़ाई को अदालत तक लेकर जाया जाएगा. ग्रामीणों की चिंता का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि CTH लागू होने से किसानों की जमीन छीनने का खतरा मंडरा रहा है. अधिकारियों द्वारा माइनिंग (खनन) कार्य की बात कही जा रही है, जिससे न केवल किसानों की जमीन प्रभावित होगी, बल्कि उनके जीवन-यापन के साधन भी खत्म हो जाएंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जमीन हड़पने की साजिश रची जा रही है.
उन्होंने ने क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट क्षेत्र के विकास पर जोर देते हुए कहा कि सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर की पहचान है. और यहां का संतुलित विकास जरूरी है. यदि सरिस्का खत्म होता है तो हजारों लोगों का रोजगार भी समाप्त हो जाएगा, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा, जिले के टुकड़े होने के सरिस्का ही आय का स्रोत बचा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरिस्का और अलवर के समग्र विकास के पक्ष में है, लेकिन विकास के नाम पर किसानों और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि जहां टाइगर की ब्रीडिंग है उस एरिया को हटाकर अलवर शहर के समीप वाले एरिया को क्यों जोड़ा जा रहा है. CTH एरिया के कारण ही आज सरिस्का में टाइगर्स की संख्या 52 तक पहुंची है. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब किसानों को बर्बाद किया जा रहा है. सरकार के लोगों को फॉरेस्ट की नहीं माइंस के लोगों की चिंता ज्यादा है.
पर्यावरण कार्यकर्ता राजेश कृष्ण सिद्ध ने सरकार के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि CTH (क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट) एरिया में बदलाव करना पूरी तरह गलत है और यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना हो सकता है.
राजेश कृष्ण सिद्ध के मुताबिक, कोर और बफर एरिया को मिलाकर कुल 881 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र तय किया गया था, जिसे साल 2007 में केंद्र सरकार ने नोटिफाई किया था. उनका कहना है कि अब इस एरिया में बदलाव करने की कोई जरूरत नहीं है और सरकार के पास इसका सही जवाब भी नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने CTH एरिया में छेड़छाड़ की, तो अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस एरिया में बदलाव पर रोक लगा चुका है, इसलिए कोई भी फैसला कोर्ट के निर्देश के बिना नहीं लिया जा सकता.
एडवोकेट कमलेंद्र ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि CTH एरिया को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह वन्यजीव कानून का उल्लंघन होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी सरकार को खुश करने के लिए गलत तरीके से दूरी माप रहे हैं. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक खदान (माइंस) का क्षेत्र 17 किलोमीटर है, लेकिन उसे 10 किलोमीटर बताकर बंद करने की बात की जा रही है, जबकि वह खदान 1980 से चल रही है और उसका मामला अभी एनजीटी भोपाल में चल रहा है.
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने भी सरकार के इरादों पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि आखिर किस दबाव में सरकार CTH एरिया में बदलाव कर रही है और क्या इसका मकसद खदानों को चालू करना है. वहीं, अलवर की जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला ने इस मामले पर कहा कि अभी सिर्फ लोगों से आपत्तियां मांगी गई हैं. इन आपत्तियों पर सुनवाई की जा रही है और इसके बाद रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी जाएगी.
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