किसानों का विरोध प्रदर्शनहिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में आज किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया. दरअसल, रामपुर बुशहर के दत्तनगर स्थित मिल्क फेड के मिल्क चिलिंग प्लांट के बाहर आज किसानों ने दूध न उठाए जाने को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया. किसानों का आरोप है कि बीते एक हफ्ते से उनका करीब एक लाख लीटर दूध प्लांट द्वारा नहीं लिया गया है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. वहीं, प्लांट ने सड़कें ठीक न होने का बहाना बनाया है.
कुल्लू, शिमला और मंडी जिलों के ऊपरी क्षेत्रों से प्रदर्शन करने आए दुग्ध उत्पादकों का कहना है कि 24 जनवरी के बाद मिल्क फेड के मिल्क चिलिंग प्लांट दत्तनगर ने बर्फबारी और सड़क बंद होने का हवाला देकर दूध लेना बंद कर दिया है. वहीं, किसानों का आरोप है कि जब बसें और अन्य वाहन नियमित रूप से चल रहे हैं, तो दूध न लेने का कोई ठोस कारण नहीं है. किसानों ने कहा कि इससे पहले प्राकृतिक आपदा आने के बावजूद भी दूध की सप्लाई जारी रही, लेकिन अब एक दिन की बर्फबारी को ढाल बनाकर जानबूझकर किसानों को नुकसानी में डालने का सरकारी प्रयास किया जा रहा है.
इसी मुद्दे को ले कर किसान मिल्क प्लांट के बाहर एकत्र हुए और धरना प्रदर्शन किया, लेकिन जब उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो आक्रोशित किसान कार्यालय के भीतर जाकर धरने पर बैठ गए. प्लांट परिसर में कोई भी सक्षम अधिकारी मौजूद न होने से किसानों में भारी रोष देखने को मिला.
दूध उत्पादक संघ के प्रदेश सहसंयोजक, रंजीत ठाकुर ने कहा कि 24 जनवरी के बाद बिना किसी पूर्व सूचना के मिल्क फेड ने दूध लेना बंद कर दिया. यहां के किसानों की आमदनी का एकमात्र जरिया दूध है. अगर इस तरह दूध उठाना बंद किया गया तो किसान पूरी तरह आर्थिक संकट में फंस जाएंगे.
निरमंड के दुग्ध उत्पादक, सुषमा ने कहा कि मिल्क फेड ने हमारा दूध लेना बंद कर दिया है, इसलिए हम यहां धरना दे रहे हैं. अगर कल से दूध लेना शुरू नहीं हुआ तो हम अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करेंगे. इसके अलावा दूध उत्पादक संघ के संयोजक प्रेम चौहान ने कहा कि आज से पहले भी बरसात, बर्फबारी और कोरोना जैसी परिस्थितियां आईं, लेकिन दूध लेना कभी बंद नहीं हुआ. इस बार जानबूझकर किसानों का दूध नहीं लिया जा रहा है. अगर दूध नहीं लिया गया तो यह प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा. किसानों ने यह मांग भी उठाई कि दूध का भुगतान सीधे दुग्ध उत्पादकों के खातों में किया जाए, न कि सोसाइटियों के माध्यम से, और भुगतान समय पर तय किया जाए. (बिशेश्वर नेगी की रिपोर्ट)
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