खेत में काम करती महिलाएं फाइल फोटोभारत में जलवायु परिवर्तन देश के कृषि और किसानों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन कर उभर रहा है. इसके कारण खेती के तौर तरीकों में बदलाव का खतरा है. क्योंकि इसके कारण अधिक बारिश या अधिक सूखे की स्थिति बन रही है जिसके चलते कृषि प्रभावित और भारतीय कृषि क्षेत्र में काम करने वाली इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रही है. एक नए अध्ययन के मुताबिक फ्रंटियर्स इन सस्टेनेबल फूड में प्रकाशित सिस्टम्स जर्नल थर्सडे में इसका खुलासा किया गया है. इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के कारण निम्न औऱ मध्यम आय वाले देशों में होने वाले बदलाव को दिखाया गया है.
रिपोर्ट में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों के कारण दक्षिण एशियाई देश जैसे भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो सकती है. इनमें महिलाओं को मालिकाना हक, धन की कमी और पोषण की कमी जैसी समस्याओं का सामना महिलाओं को करना पड़ सकता है. इस रिपोर्ट में बताय़ा गया है कि कम आय वाले देशों में ग्रामीण कृषि में 48 फीसदी भागीदारी महिला मजदूरों की होती है, इसके बाद भी सूखे या बाढ़ जैसी कृषि को प्रभावित करने वाली घटनाओं से महिलाएं अधिक प्रभावित होती हैं. उदाहरण के लिए, रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सूखे के दौरान पुरुषों की तुलना में दोगुनी संख्या में महिलाओं ने कम खाना खाया.
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फूड सिस्टम एंड रिस्क ऑफ क्लाइमेट चेंज पर लिखे गए रिपोर्ट का शीर्षक कृषि में महिलाएं कहां है रखा गया है. इसे सीजीआईएआर जेंडर प्लेटफॉर्म, अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान, अफ्रीका के लिए सीजीआईएआर जलवायु अनुसंधान के त्वरित प्रभाव (एआईसीसीआरए) और विश्व बैंक समूह के शोधकर्ताओं ने लिखा है. द प्रिंट की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार कृषि आधारित देश में महिलाओं को जलवायु परिवर्तन के कारण परेशानियो का सामना पड़ता है. इसमें विभिन्न देशों कि रैंकिग निर्धारित करने के लिए रिपोर्ट में तीन कारणों का उपयोग किया गया है.
इनमें जलवायु परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन का खतरा और मौजूदा लैंगिंक कारण महिलाओं के हो रहे भेदभाव की समस्या तीन कारणों को शामिल किया गया है. इस रिपोर्ट में दुनिया भर के कम और मध्यम आय वाले दुनिया भर के 87 देशों को शामिल किया गया है. इस रैंकिंग में पाया गया है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सूडान और यमन जैसे अन्य देशों के साथ भारत सबसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी के देशों में से एक है. इन सभी देशों में आगे के अध्ययन के तौर पर हॉटस्पॉट की पहचान की जा सकती है, इसके लिए विभिन्न कारकों का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि इस खतरे को कम करने के लिए कारगार उपायों की खोज की जा सके और इसे अपानाया जा सके. साथ ही इसके अनुरूप कदम उठाए जा सकें.
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