प्याज किसानों ने उठाई मांगमहाराष्ट्र में प्याज किसानों के एक संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि जो किसान समय पर अपने फसल लोन का भुगतान करते हैं, उन्हें भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाए. संगठन का कहना है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो नई लोन माफी योजना ईमानदारी से कर्ज चुकाने वाले किसानों के साथ अन्याय करेगी और डिफॉल्टर किसानों को बढ़ावा देगी. संगठन ने सरकार द्वारा घोषित 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान ऋण माफी योजना' पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना में लोन चुकाने में चूक करने वाले किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है, जबकि नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसान उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
किसानों का तर्क है कि जो लोग आर्थिक अनुशासन का पालन करते हुए समय पर लोन चुकाते हैं, उन्हें भी किसी न किसी रूप में प्रोत्साहन या विशेष लाभ मिलना चाहिए, ताकि भविष्य में किसान समय पर कर्ज चुकाने के लिए प्रेरित हों.
इस योजना के तहत सरकार 2 लाख रुपये तक का फसल लोन माफ करेगी, जबकि जो किसान समय पर अपना कर्ज चुकाते रहे हैं, उन्हें 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. हालांकि, राज्य के प्याज किसान संगठन का कहना है कि नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए ये घोषित राशि काफी कम है. संगठन का तर्क है कि लोन माफी पाने वाले डिफॉल्टर किसानों को इससे कहीं अधिक लाभ मिल रहा है, जिससे ईमानदारी से कर्ज चुकाने वाले किसानों के साथ भेदभाव होने का संदेश जाता है. ऐसे में किसानों ने सरकार से मांग की है कि नियमित लोन चुकाने वालों के लिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाई जाए, ताकि उन्हें भी उचित सम्मान और लाभ मिल सके.
संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कर्ज चुकाने में चूक करने वाले किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है. उनके अनुसार, डिफॉल्टर किसानों को 2 लाख रुपये तक की लोन माफी दी जा रही है, जबकि जिन्होंने आर्थिक अनुशासन बनाए रखते हुए समय पर अपना कर्ज चुकाया, उन्हें इसके मुकाबले बहुत कम फायदा मिल रहा है. ऐसे में संगठन ने मांग की है कि यदि डिफॉल्टर किसानों को 2 लाख रुपये तक की राहत दी जा रही है, तो नियमित रूप से लोन चुकाने वाले किसानों को कम से कम 2.5 लाख रुपये का प्रोत्साहन राशि दिया जाना चाहिए. उनका कहना है कि ऐसा करने से ईमानदारी से कर्ज चुकाने वाले किसानों का उत्साह बढ़ेगा.
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि नियमित भुगतान करने वाले किसानों को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिला, तो गलत संदेश जाएगा कि समय पर लोन चुकाने के बजाय डिफॉल्ट करना ज्यादा फायदेमंद है. इससे भविष्य में कर्ज चुकाने में देरी करने वाले किसानों की संख्या बढ़ सकती है और कृषि लोन व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है. (PTI)
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