गेहूं के दाम में गिरावट (फाइल फोटो)देशभर में एक बार फिर गेहूं के बंपर उत्पादन का अनुमान है. इस बीच, कुछ राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर तैयारियां तेज हो गई है. मध्य प्रदेश में 7 फरवरी से किसानों के रजिस्ट्रेशन शुरू होने वाले है. वहीं, राजस्थान में तो गेहूं खरीद शुरू होने की तारीख का भी ऐलान हो गया है. लेकिन, इससे पहले गेहूं के दाम में गिरावट का दौर तेज हो गया है. जनवरी 2026 के चौथे हफ्ते में विभिन्न राज्यों में थोक मंडियों में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है.
सरकार के एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्ध ‘राज्य-वार थोक कीमतों के साप्ताहिक विश्लेषण’ के मुताबिक, जनवरी 2026 के चौथे हफ्ते में देश के अधिकांश राज्यों में गेहूं के थोक भाव में कमजोरी देखने को मिली. जब साप्ताहिक औसत कीमत घटकर 2,628 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई है, जबकि जनवरी के तीसरे हफ्ते में औसत कीमत 2,688 रुपये थी. यानी एक हफ्ते में औसतन करीब 59 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई.
सबसे तेज गिरावट महाराष्ट्र में देखने को मिली, जहां एक ही सप्ताह में गेहूं के भाव 11.9 प्रतिशत टूटकर 3,128 रुपये प्रति क्विंटल रह गए. छत्तीसगढ़ में भी कीमतों में 13.5 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. वहीं, प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी भावों में 1 से 3 प्रतिशत तक की नरमी बनी रही. हालांकि, कुछ राज्यों में हल्की मजबूती भी दर्ज की गई है. हरियाणा में साप्ताहिक आधार पर कीमतों में 4 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि कर्नाटक और दिल्ली में भी सीमित तेजी देखने को मिली.
इसके बावजूद सालाना आधार पर तस्वीर कमजोर ही बनी हुई है. लगभग सभी राज्यों में गेहूं के भाव पिछले साल जनवरी के मुकाबले 10 से 20 प्रतिशत तक नीचे चल रहे हैं. राज्यवार तुलना करें तो जनवरी 2025 के मुकाबले महाराष्ट्र में करीब 20 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 19 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 14 प्रतिशत तक की सालाना गिरावट दर्ज की गई है. मार्च से नई फसल की आवक से पहले गेहूं बाजार इस समय दबाव में दिखाई दे रहा है. ऐसे में जब आवक तेज होगी तो कीमतों पर और दबाव बनने की आशंका रहेगी.
हालांकि, किसानों को मिल रही ये कीमतें रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के एमएसपी 2425 रुपये प्रति क्विंटल से काफी ज्यादा हैं, जबकि नई फसल के लिए लागू रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास और थोड़ा ऊपर हैं. वहीं, मार्च और अप्रैल से शुरू होने वाली सरकारी खरीद से किसानों को राहत जारी रहने का अनुमान है.
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